HPU Shimla: स्नातक डिग्री कोर्स में इसी सत्र से लागू होगी राष्ट्रीय शिक्षा नीति, विवि ने दी हरीझंडी
प्रदेश के कॉलेजों में नए शैक्षणिक सत्र 2025-26 से स्नातक (यूजी) में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) -2020 लागू करने के लिए हरीझंडी मिल गई है।
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हिमाचल प्रदेश के 138 कॉलेजों में स्नातक (यूजी) डिग्री कोर्स में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू की जाएगी। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल की अध्यक्षता में शनिवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में इस पर सहमति बनी। बैठक में राज्य सरकार के शिक्षा सचिव डॉ. राकेश कंवर और उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत सिंह भी उपस्थित थे। एचपीयू अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की गाइडलाइन के अनुसार कॉलेजों में नीति लागू करने का प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए राज्य मंत्रिमंडल को भेजेगा।
बैठक में यह भी तय किया गया कि कॉलेजों में बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की उपलब्धता के आधार पर ही चार वर्षीय डिग्री विद रिसर्च और ऑनर्स कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। कुलपति प्रो. बंसल ने कहा कि विश्वविद्यालय सत्र 2025-26 से कॉलेजों में एनईपी लागू करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। बैठक के दौरान यूजी कोर्स के लिए तैयार पाठ्यक्रम, परीक्षा संबंधी अहम बदलाव, वार्षिक परीक्षा प्रणाली से फिर से सेमेस्टर सिस्टम में वापसी, तीन वर्ष के साथ चार साल की यूजी डिग्री विद ऑनर्स एवं रिसर्च पर विस्तृत चर्चा हुई। कुलपति ने स्पष्ट किया कि नया पाठ्यक्रम बहुविषयक होगा, जिसमें एक मुख्य (मेजर) और एक गौण (माइनर) विषय के साथ डिग्री प्रदान की जाएगी। छात्रों को चौथे वर्ष में ऑनर्स और ऑनर्स विद रिसर्च करने का विकल्प मिलेगा। कॉलेजों को अपने आधारभूत ढांचे और संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार ऑनर्स और ऑनर्स विद रिसर्च कार्यक्रम प्रदान करने की स्वतंत्रता होगी।
विद्यार्थियों को मल्टीपल एंट्री और एग्जिट की मिलेगी सुविधा
स्नातक स्तर पर एनईपी लागू होने के बाद डिग्री की पढ़ाई में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलेंगे। छात्रों को मल्टीपल एंट्री और एग्जिट की सुविधा मिलेगी। यानी कि वे सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, तीन या चार साल की डिग्री के बीच में कभी भी पढ़ाई छोड़ सकते हैं और बाद में इसे पूरा करने के लिए दोबारा प्रवेश ले सकते हैं। डिग्री संकाय आधारित होगी, जिसमें कौशल विकास को एकीकृत किया जाएगा। पाठ्येतर और पाठ्यचर्या गतिविधियों को भी एकीकृत किया जाएगा और पाठ्यक्रम व विषयों में लचीलापन रहेगा। यूजी स्तर पर अनुसंधान और नवाचार पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। छात्रों को डिग्री के लिए निर्धारित क्रेडिट के साथ-साथ स्वयं और अन्य मान्यता प्राप्त ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से 40 क्रेडिट अर्जित करने की सुविधा भी मिलेगी। डिग्री मुख्य कोर्स के आधार पर ही प्रदान की जाएगी।
चार साल की डिग्री के लिए 168 क्रेडिट अनिवार्य
चार साल की डिग्री के लिए 168 क्रेडिट अनिवार्य होंगे। स्नातक डिग्री कोर्स में सेमेस्टर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू होने के साथ ही छात्रों को चार साल की डिग्री विद ऑनर्स और रिसर्च पूरी करने के लिए कुल 168 क्रेडिट अर्जित करने होंगे। इसके तहत पहले वर्ष में 44 क्रेडिट, दूसरे वर्ष में 86 क्रेडिट, तीसरे वर्ष में 128 क्रेडिट और चौथे वर्ष में 168 क्रेडिट प्राप्त करना अनिवार्य होगा। पाठ्यक्रम मुख्य और सामान्य दो प्रकार के होंगे। बैठक में एनईपी क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष प्रो. बीके शिवराम ने स्नातक कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय कॉलेजों को नीति लागू करने की तैयारी के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा, जिसमें सभी कॉलेजों के प्राचार्य, एनईपी समन्वयक और एबीसी नोडल अधिकारी भाग लेंगे।
संयुक्त और दोहरी डिग्री की संभावनाएं तलाशेगा विवि
कुलपति प्रो. बंसल ने शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण पर जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य करेगा। एचपीयू जल्द ही देश के प्रमुख संस्थानों के सहयोग से संयुक्त डिग्री, दोहरी डिग्री और ट्विनिंग कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं को तलाशेगा। 3 और 4 साल के स्नातक कार्यक्रमों में छात्रों के लिए कई प्रवेश और निकास विकल्पों की सुविधा उपलब्ध होगी। नीति लागू होने के बाद तीस दिनों के भीतर परिणाम घोषित करने के लिए क्लस्टर स्तर पर मूल्यांकन की व्यवस्था की जाएगी। परीक्षा केंद्र से सीधे उत्तर पुस्तिकाओं को ले जाकर मूल्यांकन किया जाएगा, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी।
नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तैयार करें विस्तृत चेकलिस्ट
शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने विश्वविद्यालय प्रशासन से यूजी में नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत चेकलिस्ट तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष ध्यान केंद्रित करने, छात्रों को ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराई जा सकने वाली शिक्षण सामग्री की व्यवस्था करने और एनईपी के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक निगरानी समिति का गठन करने का सुझाव दिया। उन्होंने मूल्यांकन और परिणाम घोषित करने के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय और कॉलेजों समेत शिक्षा विभाग के बीच नियमित संवाद और आपसी समन्वय बनाए रखने के लिए महीने में कम से कम एक बैठक आयोजित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।