कहीं इसलिए तो नहीं बनाई बेटे की फर्जी मार्कशीट?
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कहीं अपने लाडले को प्रदेश विश्वविद्यालय में नौकरी लगाने के चक्कर में आरोपी ने फर्जी मार्क्सशीट फर्जीवाड़ा तो नहीं किया? इस तरह की चर्चाएं सामने आने के बाद पुलिस इस दिशा में भी काम कर रही है।
अब पुलिस आरोपी के बेटे और परिणाम तैयार करने वाली शाखाओं में कार्यरत कर्मचारियों को भी जांच के घेरे में लाने की तैयारी में है। पुलिस ने बीए अंतिम वर्ष और इस मामले से संबंधित शाखाओं से रिकॉर्ड कब्जे में लिया है।
आरोपी विवि में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर तैनात है। आरोपी ने अकेले फर्जी मार्क्सशीट तैयार की, इस बात का खुलासा शुरूआती जांच में हो गया है। आखिरी मार्क्सशीट को तैयार करने के पीछे क्या खास मकसद रहा है इसकी परतें दो से तीन दिन में खुल सकती हैं।
पुलिस रिमांड पर है आरोपी अफसर
मौजूदा समय में आरोपी पुलिस रिमांड पर पुलिस स्टेशन बालूगंज में बंद है। उससे पूछताछ चल रही है। सोमवार को केस से संबंधित कुछ और दस्तावेज पुलिस हासिल करेगी। विश्वविद्यालय में एक छात्र संगठन ने इस फर्जी मार्क्सशीट का मामला उजागर किया।
गिरफ्तारी के बाद मामले के आरोपी सहायक कुल सचिव बीए फाइनल ईयर ब्रांच इंचार्ज बीके शर्मा ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल लिया है। आरोपी ने माना कि उसने ही बेटे को नंबर देकर पास करवाया। बेटे ने परीक्षा नहीं दी थी।
इन नंबरों की हिस्ट्री शीट और अन्य रिकॉर्ड में एंट्री करने के बाद उसने इसे कंप्यूटर शाखा में प्रिंट करने को भेजा था। यहां से फर्जी मार्क्सशीट प्रिंट होकर आ गई थी। इस मार्क्सशीट को तैयार करने में उसके साथ कोई नहीं था। पुलिस अभी तक आरोपी के बयानों पर पूरी तरह विश्वास नहीं कर रही है। डीएसपी बलबीर जसवाल ने कहा कि छानबीन की जा रही है।
फार्म भरने, मार्क्सशीट बनने तक की जांच
फर्जी मार्क्सशीट मामले में भले ही पैसे का लेनदेन न हुआ हो, मगर मामले की जांच को बनी फेक्ट फाइंडिंग कमेटी फार्म भरने से मार्क्सशीट बनने तक की जांच करेगी। छात्र के कॉलेज, परीक्षा केंद्र तक भी जांच होगी।
अधिष्ठाता अध्ययन की अध्यक्षता में गठित कमेटी के तैयार एक्शन प्लान में कमेटी तह तक जाएगी। प्लान में परीक्षा, इवेल्यूएशन और परिणाम तैयार होने तक गहन जांच होगी। मामला विवि के संबंधित शाखा के अधिकारी और उसके बेटे से जुड़ा है, तो विवि की प्रतिष्ठा का सवाल है। इसलिए कमेटी इस प्रकरण की तह तक पहुंचेगी।
फेक्ट फाइंडिंग कमेटी के अध्यक्ष अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. टीसी भल्ला ने माना कि जांच की रूप रेखा तैयार कर ली गई है। छात्र के परीक्षा फार्म भरने से लेकर परीक्षा रिकार्ड, उत्तर पुस्तिका जांच से लेकर मार्क्सशीट तैयार करने तक की प्रक्रिया की जांच होगी। कमेटी में विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्याम लाल कौशल और विधि विभाग के प्रो. कैलाश ठाकुर भी सदस्य है।
परीक्षा शाखाओं में सुरक्षा राम भरोसे
विश्वविद्यालय की परीक्षा शाखाओं में सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं हैं। सालों से चली आ रही इस व्यवस्था में न ही कोई बदलाव किया गया। हालांकि कुलपति कार्यालय के बाहर और भीतर एकसाथ दर्जनों सुरक्षा कर्मी 24 घंटे पहरा देते हैं लेकिन विवि के सबसे संवेदनशील तथा गोपनीय विंग में एक भी पुलिस कर्मी तैनात नहीं है।
प्रशासनिक भवन और परीक्षा विंग में हर कोई बेरोकटोक आ जा सकता है। फर्जी मार्क्सशीट मामले के बावजूद अभी तक सुरक्षा की यही व्यवस्था चल रही है। परीक्षा विंग में छात्रों के प्रश्नपत्र से लेकर सिक्रेसी, कंडक्ट और छात्रों के परिणाम की हिस्ट्री शीट तथा कंप्यूटर शाखाओं में परिणाम तैयार होते हैं। इनमें छात्र और अभिभावक कभी भी पूछताछ करने पहुंच जाते हैं।
वे चाहें तो दस्तावेज और रिकार्ड से छेड़खानी भी कर सकते हैं। स्टाफ की कमी और लचर सुरक्षा व्यवस्था भी फर्जीवाड़े की वजह हो सकती है। प्रशासनिक भवन और इससे अटैच परीक्षा शाखाओं में किसी भी मंजिल में सुरक्षा के इंतजाम नहीं। विवि के कुलसचिव प्रो. मोहन झारटा ने कहा कि सुरक्षा और कड़ी की जाएगी। व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा ताकि परीक्षा विंग में बेरोकटोक एंट्री न कर सके। एचपीयू इसके लिए गंभीर है।