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अफसरों की मिलीभगत से हुआ था गलत इंतकाल, प्रशासन ने किया खारिज
Sun, 26 Jul 2020 11:54 AM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर
अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 26 Jul 2020 11:54 AM IST
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प्रदेश तकनीकी विवि हमीरपुर को आवंटित जमीन के बेशकीमती भूखंड को कुछ कारोबारियों के नाम करने के फर्जीवाड़े की जांच पूरी हो गई है। इस मामले की जांच तहसीलदार सदर के बजाय प्रशासन ने तहसीलदार टौणीदेवी से करवाई है। लगभग ढाई साल तक चली जांच के बाद रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी गई। रिपोर्ट मिलने के बाद एसडीएम हमीरपुर ने गलत इंतकाल को खारिज कर दिया है।
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अमर उजाला ने 30 मार्च 2018 को इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। खबर छपने के बाद प्रशासन हरकत में आया और तत्कालीन उपायुक्त राकेश प्रजापति ने इस मामले पर जांच बिठाई। उनके तबादले के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया। अमर उजाला ने इस मामले को 4 दिसंबर 2019 में दोबारा प्रमुखता से उठाया। वर्तमान उपायुक्त हरिकेश मीणा ने मामले की निष्पक्ष जांच कर शीघ्र रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।
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अब जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि तकनीकी विवि को आवंटित भूमि पर कुछ लोगों के नाम हुआ इंतकाल गलत था। इसे एसडीएम हमीरपुर ने खारिज कर दिया है। तकनीकी विवि के रजिस्ट्रार राकेश शर्मा ने कहा कि जिला प्रशासन ने जमीन मामले में विवि के पक्ष में फैसला दिया है।
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1300 में से 52 कनाल भूमि मिली है तकनीकी विवि को
विवि को ग्राम पंचायत दडूही में भूमि आवंटित हुई है। 1300 कनाल भूमि में से 52 कनाल भूमि तकनीकी विवि के नाम हो चुकी है। जबकि शेष वन भूमि को तकनीकी विवि के नाम करने के लिए जिला प्रशासन ने फाइल वन और पर्यावरण मंत्रालय को वर्ष 2014 में भेजी हुई है।
यह है मामला
तकनीकी विवि को जिला प्रशासन ने जो जमीन आवंटित की है, उसके नजदीक करीब 8 लोगों को वर्ष 1975 में पट्टे पर जमीन आवंटित हुई थी। कुछ कारोबारियों ने अलाटियों से करीब साढ़े चार कनाल भूमि खरीद ली। जिसकी रजिस्ट्री भी हो चुकी है। इसी बीच राजस्व विभाग की मिलीभगत के चलते खरीददारों को उस खसरा नंबर की रजिस्ट्री कर दी गई, जो तकनीकी विवि को अलॉट हुआ था। हैरानी की बात है कि संबंधित खसरा नंबर पर खुदरो दरख्तान यानी वन भूमि लिखा है। इस खसरा नंबर को तकनीकी विवि ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पास स्वीकृति के लिए राजस्व विभाग ने भेजा हुआ है।
वर्ष 2018 में तकनीकी विवि की ओर से करवाई गई निशानेदही के दौरान यह मामला पकड़ा था। विवि ने जिस खसरा नंबर की फाइनल फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए वन और पर्यावरण मंत्रालय को भेजी है, वह जमीन हमीरपुर के कुछ लोगों के नाम कर दी गई है। इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तहसीलदार टौणीदेवी को नियुक्त किया गया था। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद इंतकाल को खारिज कर दिया गया है। - डॉ. चिरंजी लाल चौहान, एसडीएम हमीरपुर।