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HP High Court: एमबीयू फर्जी डिग्री आपराधिक मामले में चालान की प्रति पेश करने के आदेश

Sat, 19 Aug 2023 06:30 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 19 Aug 2023 06:30 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने एमबीयू फर्जी डिग्री आपराधिक मामले में दायर चालान को पेश करने के आदेश दिए हैं। इसके लिए अदालत ने महाधिवक्ता कार्यालय को एक हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया है।

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HP High Court: Present copy of challan in MBU fake degree criminal case
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एमबीयू फर्जी डिग्री आपराधिक मामले में दायर चालान को पेश करने के आदेश दिए हैं। इसके लिए अदालत ने महाधिवक्ता कार्यालय को एक हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन की खंडपीठ ने जांच में सही पाई गई डिग्रियों की सूची भी तलब की है। अदालत ने इसकी सुनवाई 28 अगस्त को निर्धारित की है।

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मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से फर्जी डिग्री आपराधिक मामले दायर किए गए चालान को पेश करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई। अदालत ने इसके लिए सिर्फ एक हफ्ते का समय दिया है। एमबीयू के लगभग 250 छात्रों ने अदालत को पत्र लिख कर अपनी वास्तविक डिग्रियां दिलवाने की गुहार लगाई है। अदालत को बताया है कि डिग्रियां न मिलने के कारण उन्हें उच्च शिक्षा के लिए दाखिला भी नहीं मिल पा रहा है।
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उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग ने मानव भारती विश्वविद्यालय के फर्जी डिग्रियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच और उनका सत्यापन करने के लिए कमेटी गठित करने का आदेश दिया था। छात्रों का कहना था कि डिग्रियों का सत्यापन न होने से उनका भविष्य अधर में है।
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विश्वविद्यालय पर फर्जी डिग्रियां बांटने का आरोप है। विशेष जांच टीम मामले की पहले से ही पड़ताल कर रही है। जांच कमेटी गठित होने के बाद से सैंकड़ों छात्रों ने अपने प्रमाणपत्रों को जांचने के लिए आवेदन किए हैं। मानव भारती की ओर से उच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल जवाब में भी आग्रह किया है कि पुलिस को निर्देश दिए जाएं कि वह इस मामले से संबंधित जांच को जल्द से जल्द पूरा करें।

हाईकोर्ट ने तहबाजारियों को 5 सितंबर तक बढ़ाई राहत

लोअर बाजार शिमला के तहबाजारियों को दी राहत को हाईकोर्ट ने 5 सितंबर तक बढ़ा दिया है। राज्य सरकार ने अदालत से शिकायत निवारण तंत्र की जानकारी देने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 5 सितंबर को निर्धारित की है। अदालत ने तहबाजारियों के लिए शिकायत निवारण तंत्र बनाए जाने के आदेश दिए थे।

अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि वह मामले की आगामी सुनवाई के दौरान इसके गठन के संबंध में अदालत को बताएं। इससे पहले अदालत ने तहबाजारियों को राहत देते हुए नगर निगम शिमला को आदेश दिए थे कि वह उनको हटाने से पहले 30 दिनों का नोटिस दें। अदालत ने स्पष्ट किया था कि जिन तहबाजारियों को हटा दिया है, उन्हें भी 30 दिनों का नोटिस जारी किया जाए।

अदालत ने नगर निगम को आदेश दिए थे कि वह स्टेटस रिपोर्ट के माध्यम से अदालत को बताए कि कितने लोगों को नोटिस दिया और इन लोगों के पुनर्स्थापन में कितना समय लगेगा। अदालत ने कहा था कि कोई भी तहबाजारी एंबुलेंस और अग्निशमन की गाड़ियों की आवाजाही में बाधा नहीं डालेगा। तहबाजारी एसोसिएशन ने अदालत को बताया कि पथ विक्रेता अधिनियम 2014 के तहत किसी भी तहबाजारी को हटाने से पहले 30 दिनों का नोटिस दिया जाना जरूरी है।
 

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