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Himachal: ओबेरॉय ग्रुप के पास तीन महीने रहेगा वाइल्ड फ्लॉवर हॉल, शराब पर प्राकृतिक खेती सेस वसूली पर रोक

Fri, 28 Mar 2025 11:48 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 28 Mar 2025 11:48 AM IST
सार

सरकार ने अदालत को बताया गया कि जब तक इस होटल को चलाने के लिए सरकार वैश्विक टेंडर आमंत्रित नहीं करती, तब तक सरकार और डीईआईएच लिमिटेड के बीच एक शपथ पत्र हस्ताक्षरित किया गया है। 

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HP high Court: Oberoi Group will have Wild Flower Hall for three months, ban on collection of natural farming
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 वाइल्ड फ्लॉवर हॉल अगले तीन महीने के लिए ओबेरॉय ग्रुप के पास ही रहेगा। हिमाचल प्रदेश सरकार फिलहाल मशोबरा में स्थित वाइल्ड फ्लावर हॉल को खुद चलाने की स्थिति में नहीं है। इसके लिए सरकार ने इस संपत्ति को अगले तीन महीने के लिए लीज पर ओबेरॉय समूह को देने का फैसला लिया है। हाईकोर्ट में यह जानकारी राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने हलफनामा दायर कर दी। सरकार ने अदालत को बताया गया कि जब तक इस होटल को चलाने के लिए सरकार वैश्विक टेंडर आमंत्रित नहीं करती, तब तक सरकार और डीईआईएच लिमिटेड के बीच एक शपथ पत्र हस्ताक्षरित किया गया है।

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इसके आधार पर ही इसे लीज पर सौंपने की बात की गई है। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकल पीठ कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय की ओर से होटल का कब्जा प्रदेश सरकार को सौंपने की समय सीमा 31 मार्च 2025 निर्धारित की गई है। महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सरकार अगर इस होटल को खाली रखती है तो इससे प्रदेश के राजस्व को घाटा होगा। इसलिए सरकार ने तय किया है कि इस होटल को ओबेरॉय ग्रुप को दिया जाए। सरकार की ओर से जैसे ही इसे चलाने के लिए वैश्विक टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे, वैसे ही होटल को वापस ले लिया जाएगा।

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शराब पर प्राकृतिक खेती सेस वसूली पर रोक
 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शराब पर प्राकृतिक खेती सेस वसूली पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने सरकार को फटकार लगाते हुए इस मामले से संबंधित सारा रिकॉर्ड अपने पास रख लिया है। मामले की आगामी सुनवाई दो अप्रैल को होगी। शराब विक्रेताओं की ओर से वर्ष 2024 में याचिकाएं दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 27 मार्च को जब शराब के ठेकों की नीलामी की गई तो उस समय 23 मार्च 2024 की अधिसूचना को हटा दिया गया लेकिन सरकार ने सितंबर 2024 में एक्साइज पॉलिसी में संशोधन कर 10.37 खंड को फिर जोड़ दिया। इसकी वजह से विक्रेताओं को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। सरकार ने इस पॉलिसी में शराब को बेचने और खरीदने के लिए न्यूनतम मूल्य 10 फीसदी और अधिकतम 30 फीसदी तय किया। सरकार की इस अधिसूचना के तहत अगर शराब को निर्धारित मूल्य से ऊपर या नीचे बेचा गया तो इसके लिए जुमनि का प्रावधान किया है। उल्लंघन करने पर पहली मर्तबा 15 हजार, दूसरी बार 25 हजार, तीसरी दफा 50 हजार और चौथी बार एक लाख रुपये के जुमनि का प्रावधान किया। सरकार की ओर से हर बोतल पर प्राकृतिक खेती सेस 10 रुपये और मिल्क सेस 2 से 5 रुपये तक लिया जाता है। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गई है। 

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