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HP High Court: हिमाचल में जैविक संसाधनों के इस्तेमाल के लिए लेना होगा अनापत्ति प्रमाण पत्र

Sat, 27 May 2023 06:28 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 27 May 2023 06:28 PM IST
सार

प्रदेश जैविक विविधता अधिनियम 2002 के कार्यान्वयन को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। अदालत ने आदेश दिए हैं कि वन, आयुष और कृषि विपणन बोर्ड को जैविक संसाधनों के इस्तेमाल के लिए जैविक बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होगा। 

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HP High Court: No objection certificate will have to be taken for the use of biological resources in Himachal
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश जैविक विविधता अधिनियम 2002 के कार्यान्वयन को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। अदालत ने आदेश दिए हैं कि वन, आयुष और कृषि विपणन बोर्ड को जैविक संसाधनों के इस्तेमाल के लिए जैविक बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि आयुर्वेदिक, सिद्धा, युनानी और होम्योपैथी दवाइयों को निर्यात परमिट जारी करने से पहले एनओसी जारी करेगा। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि हिमाचल प्रदेश वन निगम ने सरकार से गुहार लगाई है कि बिरोजा, तारपीन और कत्था उद्योगों को जैविक विविधता अधिनियम 2002 से बाहर रखा जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस बारे में निर्णय लेने से पहले दोनों पक्षों की सुनवाई करनी जरूरी है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए मामले को 30 मई के लिए सूचीबद्ध किया है।

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पिछली सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया था कि सरकार की ओर से संबंधित कंपनियों को जैविक विविधता अधिनियम की धारा 7 के तहत नोटिस जारी किया जा रहा है। अधिनियम की धारा 23 और 24 के तहत राज्य जैव विविधता बोर्ड से अनुमति लेने का प्रावधान है। यदि कोई कंपनी जैविक संसाधनों को बिना स्वीकृति से इस्तेमाल करती है तो उस स्थिति में अधिनियम की धारा 56 के तहत एक लाख रुपये जुर्माने की सजा का प्रावधान है। याचिकाकर्ता ने अदालत को सुझाव दिया था कि सरकार की ओर से दिए जाने वाले नोटिस में ये सारे आदेश होने चाहिए। संबंधित कंपनियों को आदेश दिए जाएं कि प्रदेश के जैविक संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए राज्य जैव विविधता बोर्ड से स्वीकृति ली जाए। अदालत ने सरकार को बाकी सुझावों की अनुपालना करने के आदेश दिए थे।
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पीपल फॉर रिसपांसिबल गवर्नेंस ने जैविक विविधता अधिनियम 2002 के कार्यान्वयन के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। आरोप लगाया है कि सरकार इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने में विफल रही है। यह अधिनियम राज्य को स्वयं के जैविक संसाधनों का उपयोग करने के लिए उनके संप्रभु अधिकारों को मान्यता देता है। अधिनियम ने जैव संसाधनों तक पहुंच और विनियमित करने के लिए त्रिस्तरीय संरचना का प्रावधान किया गया है। इसमें राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, राज्य जैव विविधता बोर्ड और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियों का गठन किया गया है।

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वाहन दुर्घटना में आश्रितों को 11.68 लाख का मुआवजा

जिला अदालत शिमला ने वाहन दुर्घटना में आश्रितों को 11.68 लाख रुपये का मुआवजा दिया है। वाहन दुर्घटना प्राधिकरण शिमला ने मुआवजे की राशि एक महीने के भीतर 12 फीसदी ब्याज के साथ अदा करने के आदेश दिए हैं।
सुन्नी तहसील के गांव तलाह निवासी हुकमी राम की वाहन दुर्घटना में मौत हो गई थी। अदालत को बताया गया कि हुकमी राम ट्रक में क्लीनर का काम करता था। 11 मार्च 2018 को वह रामपुर में सीमेंट का ट्रक खाली कर दाड़लाघाट की ओर आ रहा था।

रास्ते में चालक की लापरवाही के कारण ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना में हुकमी राम को गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। उसकी मां और भाई ने मुआवजा के लिए वाहन दुर्घटना प्राधिकरण शिमला में याचिका दायर की। अदालत के समक्ष दलील दी गई कि हुकमी राम महीने के 11000 रुपये कमाता था और दुर्घटना के समय वह केवल 30 वर्ष का था। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन पर आश्रितों को 11.68 लाख रुपये का मुआवजा अदा करने के आदेश दिए है। 

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