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HP High Court: घटिया दवाइयों के उत्पादन पर दो हफ्ते में जवाब दे दवा उत्पादक एसोसिएशन

Tue, 29 Aug 2023 07:35 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 29 Aug 2023 07:35 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में घटिया दवाइयों के उत्पादन पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने प्रदेश की दवा उत्पादक एसोसिएशन को याचिका का जवाब दायर करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। 

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HP High Court: Drug Manufacturers Association to respond in two weeks on the production of substandard medicin
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में घटिया दवाइयों के उत्पादन पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने प्रदेश की दवा उत्पादक एसोसिएशन को याचिका का जवाब दायर करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि एसोसिएशन को जवाब दायर करने के लिए अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। मामले की सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित की गई है।

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मंगलवार को सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने इस मामले में जवाब दायर कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभी सरकार का जवाब अदालत के समक्ष नहीं पहुंचा है। अदालत ने मामले की सुनवाई दवाइयों के लिए प्रयोगशाला न होने वाली जनहित याचिका के साथ सूचीबद्ध किया है।
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दैनिक समाचार पत्र में छपी खबर पर अदालत ने जनहित में याचिका दर्ज की है। खबर में उजागर किया गया है कि राष्ट्रीय औषधि नियामक और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने हिमाचल में निर्मित 11 दवाइयों के नमूनों को घटिया घोषित किया है, जबकि एक नमूने को नकली पाया गया। नकली पाई जाने वालों में एक पशु चिकित्सा दवा भी शामिल है। घटिया और नकली दवाइयों के निर्माता बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़, काला अंब के साथ-साथ पांवटा साहिब के औद्योगिक समूहों में स्थित हैं।
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इन दवाइयों की परख सामग्री की कमी, विघटन, वजन में एकरूपता, कण पदार्थ की उपस्थिति आदि जैसे मुद्दों की पहचान के गुणवत्ता मानकों में विफल रहे मुख्य कारणों के रूप में की गई है। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा था कि सेंट्रल बैंक की ओर से दवाइयों के परीक्षण प्रयोगशाला बनाने के लिए जारी किए गए 30 करोड़ रुपये कहां खर्च किए गए। इसके अलावा अदालत ने ड्रग इंस्पेक्टर के खाली पदों की जानकारी मांगी है। पीपल फॉर रिस्पांसिबल गवर्नेंस संस्था ने सूबे में दवाइयों के परीक्षण प्रयोगशाला न होने पर याचिका दायर की है।

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