राजभवन से मंजूरी नहीं, दोबारा खेल विधेयक पेश कर सकती है सरकार
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आने वाले मानसून सत्र से पहले अगर राजभवन से खेल विधेयक पर निर्णय नहीं होता है तो राज्य सरकार फिर से विधानसभा में नया बिल पेश कर सकती है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वीरवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राजभवन संविधान के खिलाफ जाकर कोई भी विधेयक रोककर नहीं रख सकता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यपाल या तो विधेयक को विधानसभा को वापस करें या मंजूरी दें। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि राजभवन जल्द ही इस पर निर्णय ले लेगा। लेकिन अगर निर्णय नहीं लिया गया तो वह विधेयक को फिर से विधानसभा में पास कर मंजूरी के लिए उनके पास भेज सकती है।
सीएम ने कहा कि हाल ही में क्रिकेट में राजनीतिक दखल खत्म करने और पारदर्शिता लाने के लिए जिस तरह लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू किया गया है, उसी तर्ज पर हिमाचल सरकार ने खेल विधेयक बनाया था।
सीयू पर हो रही राजनीति
सीएम ने कहा कि सीयू पर यूपीए शासनकाल के दौरान फैसला हुआ था। तय हुआ था कि मंडी में आईआईटी और धर्मशाला में सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनेगी। उस समय किसी ने कोई आवाज नहीं उठाई, लेकिन अब निजी स्वार्थ और राजनीति के लिए इसे मुद्दा बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सीयू का मुख्य कैंपस धर्मशाला में ही बनेगा। हां, अगर किसी को शैक्षणिक संस्थान की जरूरत हुई तो यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेज देहरा या कहीं अन्य जगह खोले जा सकते हैं।