छोटे किसानों-बागवानों को राहत देने की तैयारी, रेगुलर होंगे अवैध कब्जे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल सरकार अवैध कब्जा धारक उन किसानों और बागवानों को राहत देने की तैयारी में है, जिनके पास दस बीघा तक जमीन है। शर्त ये रहेगी कि उनकी अपनी और अवैध कब्जे की कुल जमीन दस बीघा या उससे कम होनी चाहिए।
प्रदेश सरकार ऐसे लोगों को राहत दिलाने के लिए फिर से हाईकोर्ट में गुहार लगाएगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि बड़े कब्जाधारियों को किसी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। प्रदेश सरकार ने 28 जनवरी को हाई पावर कमेटी की बैठक बुलाई है, जिसमें महाधिवक्ता के साथ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने पर चर्चा होगी।
राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने मंगलवार को पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि राज्य सरकार छोटे और सीमांत किसानों-बागवानों के हितों को ध्यान में रखे हुए है। पूर्व भाजपा सरकार ने अवैध कब्जों को नियमित कराने की बात कर किसानों से एफिडेविट लिए थे।
अवैध कब्जों की संख्या पहुंची 47 हजार, छोटे कब्जे पर राहत
आज ऐसे कब्जों की संख्या लगभग एक लाख 47 हजार हो गई है। उन्होंने कहा कि बहुत से छोटे और सीमांत किसान एवं बागवान ऐसे भी हैं, जिनके पास अपनी और अवैध रूप से कब्जाई गई भूमि दस बीघा से ज्यादा नहीं है।
ऐसे लोगों को राहत दिलाने के लिए सरकार हाईकोर्ट में नए सिरे से याचिका दायर कर गुहार लगाएगी कि अवैध कब्जों के तमाम मामलों को क्लब कर सुना जाए। इसके लिए हाईकोर्ट की फुल बेंच में ही सुनवाई को गुहार लगाई जाएगी।
अवैध कब्जों पर उपायुक्तों से मांगी रिपोर्ट
राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि वन और अन्य सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के मामले में राज्य सरकार ने भी उपायुक्तों से रिपोर्ट मांगी है। ये रिपोर्ट 28 जनवरी को प्रस्तावित हाई पावर कमेटी की बैठक में भी रखी जाएगी।
विरोध में शांता, कहा- कानून तोड़ने वालों को सरकार दे रही ईनाम
वरिष्ठ भाजपा नेता एवं लोकसभा सांसद शांता कुमार ने कहा है कि नियम तोड़कर सरकार की भूमि पर कब्जा करने वालों और भ्रष्टाचार करने वालों को ईनाम दिया जा रहा है। यह काम प्रदेश सरकार कर रही है जो ठीक नहीं है।
शांता ने जारी बयान में कहा कि प्रदेश सरकार ने कानून बनाकर सरकारी भूमि पर करीब 40 हजार अवैध कब्जों और कुछ भवनों को नियमित करने का भले ही फैसला किया है, लेकिन, राज्यपाल द्वारा इस कानून के बारे सरकार से जवाब मांगना एकदम तर्कसंगत और सही है।
राज्यपाल ने इस संबंध में सरकार से पूछा है कि जिन अधिकारियों के कारण अवैध कब्जे हुए, उनके विरुद्ध सरकार ने क्या कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर कब्जा करने, बागीचे लगाने और भवन बनाने वाले प्रभावशाली और संपन्न लोग हैं।
ऐसे लोगों ने सरकारी अधिकारियों से मिलीभगत कर सरकारी संपत्ति पर कब्जा जमाकर कानून की धज्जियां उड़ाई हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब 69 लाख जनसंख्या है। जिसमें कुछ हजार लोगों ने कहा कि प्रदेश सरकार ने इतना बड़ा निर्णय प्रदेश का हित सोच कर लिया होगा।
लेकिन उन्हें किसी भी नजर से यह फैसला प्रदेश और देश हित में नहीं लग रहा है। नियम और कानून निभाने के लिए होते हैं तोडने के लिए नहीं। उन्होंने सरकार और सभी राजनीतिक दलों से इस निर्णय पर दोबारा विचार करने की अपील की है।