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हिमाचल विस सत्र: इन्वेस्टर्स मीट और महंगाई की भेंट चढ़ गए जनता के कई सवाल

Wed, 11 Dec 2019 10:32 AM IST
Krishan Singh सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, तपोवन (धर्मशाला)
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, तपोवन (धर्मशाला) Published by: Krishan Singh Updated Wed, 11 Dec 2019 10:32 AM IST
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hp assembly session: many questions from the public  lost in Investors meet and inflation debate

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के छह दिवसीय शीत सत्र के दूसरे दिन भी विपक्ष ने इन्वेस्टर्स मीट को मुद्दा बनाया और साथ ही महंगाई पर प्रदर्शन किया। बेशक महंगाई बड़ा मुद्दा है, मगर दो दिन से चल रहे इस गतिरोध के कारण हिमाचल की जनता के मतलब के दूसरे कई सवाल अनपूछे रह गए। इन पर मंत्रियों के जवाब नहीं आए, जबकि इन सवालों को इकट्ठा करने में भी जनता का पैसा और विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों का समय खर्च होता है।

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शीत सत्र के शुरू के दो दिन हंगामे और वाकआउट की भेंट ही चढ़ गए। पहले दिन चार पूर्व विधायकों के देहावसान पर शोकोद्गार के कारण प्रश्नकाल नहीं हो पाना तो स्वाभाविक था। पहले दिन सोमवार को 32 तारांकित और सात अतारांकित सवाल प्रश्नकाल में लगे थे। तारांकित प्रश्नों पर मंत्रियों के मौखिक जवाब आने थे।
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शुरुआती एक घंटे के बीत जाने के बाद नियमानुसार प्रश्नकाल नहीं हो सकता था तो इसलिए स्वाभाविक रूप से मंत्रियों के मौखिक जवाब भी नहीं आ पाए।कांग्रेस विधायक राजेंद्र राणा की ओर से प्रस्तावित जेएओ की भर्ती पर प्रस्तावित ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी नहीं लाया जा सका। पर दूसरे दिन भी प्रश्नकाल में विपक्ष के हंगामे से गतिरोध बना। दूसरे दिन मंगलवार के लिए 28 तारांकित और 8 अतारांकित सवाल लगाए गए। 28 तारांकित सवालों में से केवल छह सवालों पर ही मुख्यमंत्री और मंत्रियों के मौखिक जवाब आ पाए।
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इनमें लाडा फंड, पुलिस चौकी का स्तरोन्नयन, सिंचाई एवं पेयजल योजनाओं के लंबित कार्यों, पॉलीटेक्नीक कॉलेज में छात्रों के प्रवेश, गगल हवाई अड्डे का विस्तारीकरण, नगर निगम धर्मशाला का रिश्वत प्रकरण, सड़क निर्माण, पुल निर्माण, पांगी घाटी के लिए सीमेंट आपूर्ति, छतों पर सौर पैनल लगाने, प्राकृतिक आपदा में सहायता देने, ध्वनि प्रदूषण रोकने जैसे जनता के कई मुद्दों पर सवाल लगाए गए थे। इनमें से बहुत से पूछे ही नहीं जा सके।


केवल सदन के पटल पर ही रखे गए। कुछ सवाल शोर-शराबे में पूछे जाते रहे, मुख्यमंत्री-मंत्री हंगामे के बीच ही इनके जवाब देते रहे। बाकी तो पूछे ही नहीं जा सके, क्योंकि उन्हें पूछने वाले विधायक सदन में अनुपस्थित थे। मंगलवार को ही शिलाई के विधायक हर्षवर्द्धन चौहान ने नेशनल हाईवे पांवटा-शिलाई-हाटकोटी की बदहाली पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाना था। इसी तरह से रोहडू के विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने देहा के जंगल में एक बच्चे के लापता होने के मामले में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाने थे, पर वे वाकआउट कर गए थे, इसलिए इस पर भी सरकार का जवाब नहीं आया। 

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