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शिमला के इस इतिहास से वाकिफ नहीं होंगे आप

Sat, 08 Nov 2014 10:59 AM IST
Updated Sat, 08 Nov 2014 10:59 AM IST
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history of shimla.

ब्रिटिशकाल में देश की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला में विदेश से आने वाली डाक की सूचना घंटी बजाकर दी जाती थी। जैसे ही विलायती डाक पोस्ट ऑफिस शिमला में पहुंचती थी तो एक लाल रंग का झंडा डाकघर के ऊपर लहराया जाता था। डाक विभाग का कर्मी, जिसे घंटीवाला कहा जाता था, घंटी बजाकर दफ्तर से पीछे स्थित स्टाफ कालोनी में रहने वाले डाकिये को बुलाता था।

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आधी रात के वक्त भी अंग्रेज अफसरों को डाक पहुंचाई जाती थी। शहर के डाकखानों में डाक मेल रिक्शा से पहुंचाई जाती थी। मेल रिक्शा को चार कर्मी चलाते थे। इसका रंग लाल होता था। वर्ष 1905 तक कालका से शिमला तक टांगे पर डाक पहुंचाई जाती थी। माल रोड पर स्कैंडल प्वाइंट से सटी मुख्य डाकघर की बिल्डिंग हेरिटेज भवनों में शुमार है। आज यहां का नजारा बदला-बदला सा है। डाकघर की बिल्डिंग नए रंग रूप में नजर आती है।
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मुख्य डाकघर में तैनात फिलेटली ब्यूरो के प्रमुख प्रेम लाल वर्मा साल 1911 से 1955 तक पोस्ट आफिस में तैनात हेड पोस्ट मैन राम कृष्ण से हुई बातचीत को याद करते हुए बताते हैं कि ब्रिटिश सरकार चिट्ठियों को जल्द से जल्द पहुंचाने के पक्षधर थी। वायसराय भी मेल रिक्शा के आने पर उसे रास्ता देते थे। ग्रीष्मकालीन राजधानी होने के चलते शिमला राजनीति का मुख्य केंद्र था। कई गोपनीय पत्र भी डाक विभाग के माध्यम से वितरित होते थे।

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नवंबर से मार्च तक दिल्ली जाता था स्टाफ

history of shimla.

1942 तक मुख्य डाकघर का आधा स्टाफ 16 नवंबर से 15 मार्च तक दिल्ली ऑफिस के लिए ट्रांसफर होता था। इस अवधि के दौरान दिल्ली देश की शीतकालीन राजधानी होती थी। डाक घर में काम करने वाले स्टाफ के अनुभव को देखते हुए अंग्रेज अफसर इन्हें अपने साथ ले जाते थे।

1972 में आग लगने से जला पोस्ट आफिस

माल रोड स्थित मुख्य डाकघर का भवन 23 सितंबर 1972 को आग लगने से राख हो गया था। भवन की पहली मंजिल में आग लगी थी। आग लगने के चलते ब्रिटिशकाल से रखा सारा रिकार्ड नष्ट हो गया था। 1992 में बिल्डिंग को हेरिटेज पोस्ट आफिस का खिताब दिया गया। साल 2009 में पोस्ट आफिस को लाल और सफेद रंग से रंगा गया। इससे पहले बिल्डिंग हरे और सफेद रंग की होती थी।

इतिहास: मुख्य डाकघर की बिल्डिंग को कोनी लॉज के नाम से जाना जाता था। 1880 में डाक विभाग ने अंग्रेज पीटरसन से बिल्डिंग को खरीदा था। 1883 में यहां पोस्ट आफिस खोला गया। एफ डालटन पोस्ट आफिस शिमला के पहले पोस्टमास्टर थे। आजाद भारत के पहले पोस्टमास्टर एके हजारी नियुक्त हुए थे। तीन मंजिला बिल्डिंग टिंबर की लकड़ी और पत्थर से बनाई गई थी।

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