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ऐतिहासिक मिंजर मेला: विभाजन में गए लोग पाकिस्तान में भी मनाते रहे मिजर, पढ़ें रोचक इतिहास

Mon, 04 Aug 2025 01:03 PM IST
Krishan Singh सुभाष कुमार अग्निहोत्री, चंबा
सुभाष कुमार अग्निहोत्री, चंबा Published by: Krishan Singh Updated Mon, 04 Aug 2025 01:03 PM IST
सार

भले ही भारत-पाकिस्तान के बीच विभाजन ने भौगोलिक सीमाएं खींच दीं, लेकिन चंबा की यह परंपरा दशकों तक पाकिस्तान के रावलपिंडी के कोहटा मोहल्ले में भी उसी उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई जाती रहीं। 

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Historic Minjar Fair: People who went during partition continued celebrating Minjar in Pakistan too, read inte
ऐतिहासिक मिंजर मेला - फोटो : संवाद

विस्तार

ऐतिहासिक मिंजर मेला केवल चंबा की पहचान नहीं रहा, बल्कि इस पर्व की सांस्कृतिक जड़ें सरहद पार पाकिस्तान तक फैली थीं। भले ही भारत-पाकिस्तान के बीच विभाजन ने भौगोलिक सीमाएं खींच दीं, लेकिन चंबा की यह परंपरा दशकों तक पाकिस्तान के रावलपिंडी के कोहटा मोहल्ले में भी उसी उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई जाती रहीं। 1934 से चंबा में विधिवत रूप से मनाया जा रहा मिंजर मेला, वर्ष 1947 के बाद पाकिस्तान में जाकर बसे चंबा मूल के लोगों ने भी मनाना शुरू किया। रावलपिंडी के कोहटा स्थित मोहल्ला कश्मीरी में यह उत्सव हर साल आयोजित होता था। वहां भी चंबा की तरह बबरू, माश की दाल, कड़ी, खट्टा जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते थे। अंत में मिंजर का विसर्जन रावी नदी की तर्ज पर किया जाता था।

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वर्ष 1992-93 में मुस्लिम राजा इकबाल की मौत के बाद पाकिस्तान में मिंजर मेले की परंपरा भी बंद हो गई। इकबाल न केवल इस आयोजन को संरक्षण देते थे, बल्कि व्यक्तिगत रूप से इसमें भाग भी लेते थे। सरोल निवासी सरदार मोहम्मद ने बताया कि उनकी बहन विभाजन के बाद कोहटा में जाकर बसीं। वे हर साल वहां मिंजर उत्सव में भाग लिया करती थीं। वहां मिंजर भवन भी बना हुआ था। वहां बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होकर मिंजर मनाते और अपनों को याद करते थे। मेले के बाद चंबा की तरह ही पाकिस्तान में भी रावी नदी में मिंजर विसर्जित की जाती रही हैं। उनकी मौत के बाद नई पीढ़ी विरासत की ओर ध्यान नहीं पाई। 

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पाकिस्तान से नप अध्यक्ष को मिला था न्योता
आर्ट टीचर असगर बेग ने बताया कि नगर परिषद चंबा के रिकॉर्ड में मिंजर को पाकिस्तान में मनाए जाने की बात दर्ज है। पाकिस्तान (रावलपिंडी) से नप चंबा के अध्यक्ष पंडित सरदारी लाल को पत्र लिखकर मिंजर मेले के लिए आमंत्रित किया गया था। देश आजाद होने पर वर्ष 1947 में उनके कई रिश्तेदार पाकिस्तान जाकर बसे थे। उनके रिश्तेदार पत्र लिख कर अकसर रावलपिंडी के कोहटा स्थित कश्मीरी मोहल्ला में मनाए जाने वाले मिंजर मेले का जिक्र किया करते थे।

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पाकिस्तान में मिंजर मेले के हैं लिखित प्रमाण
 पाकिस्तान में मिंजर मेला मनाने के लिखित में प्रमाण भी हैं। आजादी के बाद पाकिस्तान जाकर बसे चंबा के लोगों की ओर से चंबा में रहने वाले अपने रिश्तेदारों को भेजे पत्र इस परंपरा की तसदीक करते हैं। चंबा में रहने वाले लोगों के पास ऐसे पत्र आज भी हैं। इन पत्रों में भी जानकारी है कि इकबाल तीज-त्योहारों को मनाने के लिए उसमें शरीक हुआ करते थे।

मिंजर विसर्जन के साथ अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला संपन्न
आठ दिवसीय ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला रविवार को रावी नदी में मिंजर विसर्जन की रस्म अदायगी के साथ संपन्न हो गया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का चौपर रविवार को खराब मौसम के चलते चंबा के लिए उड़ान नहीं भर पाया, इसलिए रावी नदी में मिंजर विसर्जन की रस्म विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने निभाई। इससे पहले मिंजर मेले के समापन मौके पर अखंड चंडी पैलेस से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा की अगुवाई विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने की। अखंड चंडी पैलेस से निकली शोभायात्रा का नेतृत्व शहर के प्रमुख देवता भगवान रघुवीर ने किया। शोभायात्रा में भगवान रघुवीर के अलावा स्थानीय देवी-देवताओं ने हिस्सा लिया। इसके अलावा पुलिस और होमगार्ड जवानों की टुकड़ियां भी शामिल रहीं। शोभायात्रा के मंजरी गार्डन पहुंचे पर लोकगायकों ने पारंपरिक कुंजड़ी मल्हार गायन किया। इसके बाद पान वितरण इत्र लगाने की रस्म अदायगी के बाद मंत्रोच्चारण के बीच विस अध्यक्ष ने रावी नदी में नारियल और मिंजर प्रवाहित कर सुख-समृद्धि की कामना की। शोभायात्रा को निहारने के लिए हजारों लोगों को हुजूम उमड़ा। इस मौके पर हज कमेटी के पूर्व चेयरमैन दिलदार अली बट्ट, जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष कमल ठाकुर, उपायुक्त मुकेश रेप्सवाल, एसपी अभिषेक यादव, एडीएम अमित मेहरा, एसी टू डीसी अपराजिता चंदेल, एसडीएम प्रियांशु खाती और डीएसपी जितेंद्र चौधरी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों के अलावा कई लोग मौजूद रहे।

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