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हिमाचल में पहली स्टार नाइट कर नाटी किंग बने राठी

Mon, 26 Nov 2018 02:01 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू Updated Mon, 26 Nov 2018 02:01 PM IST
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Himachali folk singer thakur dass rathi kullu himachal pradesh

स्कूल के समय शिक्षकों से मिले प्रोत्साहन और गुरु एसडी कश्यप के मार्गदर्शन से ठाकुर दास राठी पहाड़ी नाटियों के सुपरहिट लोकगायक बन गए। वर्ष 2006 में टी-सीरीज कंपनी ने ठाकुर दास राठी को किंग ऑफ नाटी के खिताब से नवाजा।

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कैसेट से लेकर सीडी तक का दौर देख चुके ठाकुर दास राठी की नाटियां इन दिनों यू-ट्यूब पर खूब धमाल मचा रही हैं। उनकी नाटियों को यू-ट्यूब पर लाखों बार देखा जा चुका है। उन्होंने कहा कि गायक और संगीतकार एसडी कश्यप के गीतों को सुनकर वह बहुत प्रभावित हुए। उनके पिता लोकगायक थे। 
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ठाकुर दास राठी की आवाज का जादू हिमाचल तक ही सीमित नहीं है। वह उत्तराखंड समेत अन्य पड़ोसी राज्यों में लाइव परफार्मेंस देते आए हैं। ठाकुर दास राठी ने 1995 में श्रीदेविए कोखे चली तू पहली एलबम लांच की। किस्मत ने साथ दिया और पहला ही एलबम हिट हो गया। अब तक राठी 150 से अधिक गीत गा चुके हैं। यह गीत उन्होंने खुद लिखे हैं और आवाज भी खुद दी है। कई गीतों में म्यूजिक भी खुद ही दिया है।
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राठी के अनुसार उनका लोकगीत ‘नीरू चाली घूमदी’ इस कदर हिट हुआ कि इसे हिमाचल के करीब एक दर्जन कलाकारों कॉपी कर गाया। पुराने गीतों को तोड़ मरोड़ कर पेश करना और चोरी करने से ठाकुर दास राठी बेहद आहत हैं। 2003 में हिमाचली स्टार नाइट का आगाज ठाकुर दास राठी के माध्यम से कला केंद्र में अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में हुआ।

मेरे गीतों को गाकर कई बन गए गायक

राठी ने कुल्लवी के अलावा मंडयाली, कांगड़ी, अप्पर शिमला के लोकगीत भी गाए हैं। उनका मुख्य मकसद लोक संस्कृति का संरक्षण है। हिमाचली फोक को बुलंदी पर देखना लक्ष्य है। उनका कहना है कि हर गीत में नयापन लाने के साथ संस्कृति की महक जिंदा रखने की कोशिश की जाती है।

उन्होंने कहा कि मेरे गीतों को चोरी करने के बाद उन्हें गाकर कई बड़े गायक बन गए हैं। पर उन्होंने कभी भी पुराने गीत तोड़-मरोड़ कर नहीं गाए और न ही दूसरों के गीत गाए। पिता स्वर्गीय ख्याल चंद राठी भी गाने का शौक रखते थे।  

इन लोकगीतों ने फैंस पर छोड़ी छाप 
ठाकुर दास राठी के शालू रे क्वाटरा, हो सुमित्रा, बांकी चंद्रा, हवा लागी चंडीगढ़ा री, प्रमिला तेरे गांवा लागे मेले, नीशू चाली कॉलेजा, नीलूए मेरी लशटिए, सुषमा मेरी जानिए, रूशदे मनांदे, नीली नील अखियां काजलू लाया, झूमके वाली मेरी झूमके वाली गीत उनके फैंस के दिलों में छाप छोड़ गए हैं। ठाकुर दास राठी के लोकगीतों का डीजे पर भी खूब धमाल मचता है।

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