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हिमाचल विधानसभा बजट सत्र: संस्थानों को बंद करने पर सदन में हंगामा, नारेबाजी के बाद बाहर निकला विपक्ष

Wed, 15 Mar 2023 11:20 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 15 Mar 2023 11:20 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन भी सदन में गतिरोध बरकरार रहा। 920 सरकारी संस्थानों को बंद करने को लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा भी किया।  सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने काम रोको प्रस्ताव लाया, जिसे सदन ने मंजूर करते हुए चर्चा की सहमति दी।

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Himachal Vidhansabha budget session: Uproar in the House on the second day, opposition did a walkout after slo
विपक्ष ने किया वाकआउट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन भी सदन में गतिरोध बरकरार रहा। 920 सरकारी संस्थानों को बंद करने को लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा भी किया।  सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने काम रोको प्रस्ताव लाया, जिसे सदन ने मंजूर करते हुए चर्चा की सहमति दी। प्रश्नकाल के एलान से पहले विपक्ष ने सरकारी संस्थानों को बंद करने के मामले में नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव पर सारा काम रोककर चर्चा मांगी। शुरू में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस के विधायक इसका विरोध करते रहे लेकिन जैसे ही हंगामा बढ़ने लगा तो मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने दांव खेल दिया। उन्होंने कहा कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं। पूरा दिन केवल इसी एक ही विषय पर चर्चा हुई। भोजनावकाश के बाद मुख्यमंत्री ने चर्चा के समापन पर जवाब दिया तो इससे असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से नारेबाजी करते वाकआउट कर दिया। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष पठानिया ने व्यवस्था दी कि मुख्यमंत्री का स्थगन प्रस्ताव पर जवाब आ गया है। ऐसे में वाकआउट नहीं माना जाएगा। उन्होंने विपक्ष की ओर से लाए गए नियम- 67 को निरस्त करने की व्यवस्था दी। दूसरे दिन बुधवार को भी प्रश्नकाल नहीं हुआ।

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चलता रहा वार-पलटवार का दौर
भाजपा विधायकों ने अप्रैल 2022 के बाद खुले और स्तरोन्नत हुए 920 संस्थानों को बंद करने का विरोध करते हुए वीरभद्र सरकार के समय खुले संस्थानों को सुचारु तौर पर चलाने की बात कही। उधर, कांग्रेस विधायकों ने पलटवार करते हुए बिना बजट प्रावधान किए संस्थान खोल कर राजनीतिक हित साधने का आरोप लगाया। भाजपा विधायक सुखराम चौधरी ने 12 दिसंबर 2022 को एक अधिसूचना के तहत बंद किए गए संस्थानों का विरोध किया। इस पर संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्द्धन चौहान ने कहा कि नियम 67 का प्रयोग सिर्फ बहुत बड़े मामलों पर चर्चा के लिए होता है। भाजपा बीते तीन माह से संस्थान बंद करने का मामला उठा रही है। यह विषय अब महत्वपूर्ण नहीं है। सत्ता को बचाने के लिए आखिरी छह माह में धड़ाधड़ संस्थान खोल दिए। वित्त विभाग ने अप्रैल 2022 के बाद खुले 90 फीसदी संस्थानों को रिजेक्ट किया था। इस पर भाजपा विधायकों ने सदन में हंगामा करना शुरू कर दिया।
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वाकआउट पर बनेगी बड़ी खबर : सीएम  
विपक्ष के शोर करने पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि नियम 67 को रूटीन बना लिया गया है। खबरों की सुर्खियों में रहने के लिए विपक्ष ऐसा कर रहे हैं। उन्हें पता है कि वाकआउट होने पर ही बड़ी खबर बनेगी। 
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हिमाचल में हो रहा व्यवस्था परिवर्तन तभी विपक्ष में हो रही हलचल : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने चर्चा के जवाब में कहा कि हिमाचल में व्यवस्था परिवर्तन हो रहा है, तभी विपक्ष में हलचल हो रही है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर तंज कसा, वह तोलकर बोलते हैं आज भाजपा विधायकों की भाषा बोल रहे हैं। जयराम अपने विधायकों पर लगाम लगाएं नहीं तो कुर्सी खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थानों को बंद किया गया, जहां न तो भवन हैं और ही कर्मचारियों का स्टाफ है। पूर्व सरकार को चाहिए था कि वह पहले संस्थानों के लिए बजट का प्रावधान करती, उसके बाद स्टाफ मुहैया करवाकर इन्हें खोला जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि हिमाचल के 4,145 ऐसे स्कूल हैं, जो एक अध्यापक के सहारे चल रहे हैं। 455 ऐसे स्कूल हैं, जहां एक भी अध्यापक नहीं है।

शिक्षा विभाग में 12 हजार अध्यापकों और प्रवक्ताओं के खाली हैं। 286 स्कूलों में एक भी छात्र नहीं है। यही नहीं, हिमाचल के 100 कॉलेज ऐसे हैं, जहां प्रिंसिपल नहीं हैं। 140 संस्थानों में से 9 चिकित्सा संस्थानों को खोलने की वित्त विभाग से स्वीकृति मिली है। 25 कॉलेजों में से 2 कॉलेजों को वित्त विभाग ने स्वीकृति दी है। हिमाचल में चपरासी के सहारे कॉलेज चलाए गए। उन्होंने कहा कि जहां 60 छात्र होंगे, उन शिक्षण संस्थानों को बहाल किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित हैं। विधानसभा में एक महिला रीना कश्यप चुनकर आई हैं। उन्होंने पझोता में आईपीएच कार्यालय बहाल किए जाने की मांग की है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि इस कार्यालय को बहाल कर दिया जाएगा।

तालाबंदी के लिए जाने जाएंगे सीएम सुक्खू गले की फांस बन गईं 10 गारंटियां : जयराम
 नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्रियों को पानी, सड़क और बिजली में बेहतरीन कार्यों के लिए जाना जाता है, लेकिन सुखविंद्र सिंह सुक्खू को तालाबंदी करने वाले सीएम के नाम से जाना जाएगा। 
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की 10 गारंटियां मुख्यमंत्री के लिए गले का फांस बन गई हैं। ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने के लिए एसओपी को जलेबी की तरह गोल घुमाया जा रहा है। स्पष्ट बात कोई नहीं है। 
उन्होंने कहा कि अगर पूर्व सरकार ने मर्जी से संस्थान खोले हैं तो सरकार पंचायतों में जाकर लोगों से पूछे कि इन संस्थानों की कितनी जरूरत है। चार साल में जो माहौल बनता है, सुक्खू सरकार ने तीन महीने में ही बना दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह ने संस्थानों को बंद करने की शुरुआत की है। उन्हें इसका खामियाजा भुगतान पड़ेगा। उन्होंने कहा कि 11 दिसंबर, 2022 को सुक्खू सरकार का यह दिन हमेशा याद रहेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पहले डिनोटिफाई संस्थानों को नोटिफाई करें, उसके बाद इनका रिव्यू हो।

संस्थान की जरूरत नहीं है लिखकर दें सत्ता पक्ष के विधायक, तब मानेंगे कि दम है
जयराम ने कहा कि सत्ता पक्ष के सदस्यों को अगर लगता है कि संस्थानों को डिनोटिफाई करने का निर्णय उचित है तो वे आज-कल जब मर्जी मुख्यमंत्री को लिखकर को दें कि ये संस्थान बंद किए जाएं। हमें इनकी जरूरत नहीं है। तब मानेंगे कि इनमें दम हैं।
 

सभी संस्थान नहीं किए डिनोटिफाई : मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी संस्थानों को डिनोटिफाई नहीं किया गया है। नूरपुर एसपी कार्यालय में स्टाफ उपलब्ध कराया है। चौपाल में अग्निशमन चौकी अधिसूचना की गई। एम्स बिलासपुर चौकी को भी डिनोटिफाई से नोटिफाई किया गया है। 70 सालों से अस्थायी डैहर चौकी को स्थायी चौकी का दर्जा देकर अधिसूचित किया गया है। चुवाड़ी में लोक निर्माण कार्यालय को बहाल किया गया है। 

ठग थी पूर्व भाजपा सरकार : सीएम
सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वह तो चाहते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री को पता चले कि किस प्रकार उनके मंत्रिमंडल ने जनता को ठगा है। इनकी ठग सरकार थी। कभी ऐसा होता है। 286 स्कूलों में एक भी बच्चा नहीं है और स्कूल खुले हैं। 60 से ऊपर बच्चों वाले स्कूल, कॉलेज को हमने डिनोटिफाई नहीं किया। उन्हें यह लग रहा था कि काम रोको प्रस्ताव सरकार उन्हें लाने नहीं देगी और वे वाकआउट करके सुबह ही चले जाएंगे। स्पीकर ने भी रूलिंग दी है कि इनका जवाब के बाद बाहर जाना वाकआउट नहीं माना जाएगा।

पझौता आईपीएच कार्यालय बहाल
मुख्यमंत्री सुखविंद्र  सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित हैं। विधानसभा में एक महिला रीना कश्यप चुनकर आई हैं। उन्होंने पझौता में आईपीएच कार्यालय बहाल किए जाने की मांग की है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि इस कार्यालय को बहाल कर दिया जाएगा।

सत्ता संभालते ही सीमेंट फैक्टरी में लग गया ताला
जयराम ने कहा कि सुक्खू सरकार में स्कूल, कॉलेज, आईपीएच, आयुर्वेदिक संस्थान बंद होने के बाद सीमेंट फैक्टरी तक बंद हो गई। यह सब मुख्यमंत्री के शपथ लेने के बाद हुआ है। मंडी के शिवधाम को लेकर मुख्यमंत्री ने तरह तरह की टिप्पणियां की हैं। शिवधाम के लिए पहले से बजट का प्रावधान किया गया है। कहा कि हिमाचल में संस्थान कैबिनेट के फैसले पर ही खोले गए थे। कैबिनेट का फैसला कैबिनेट ही बदल सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री ने बिना कैबिनेट के ही इन संस्थानों को बंद किया है। 

एम्स को लेकर कांग्रेस और भाजपा विधायकों में श्रेय की होड़
 बिलासपुर एम्स निर्माण को लेकर बुधवार को विधानसभा में कांग्रेस और भाजपा विधायकों में श्रेय लेने की होड़ मची रही। पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में एम्स निर्माण को लेकर विचार विमर्श शुरू हो गया था। मनमोहन सिंह की यह सोच थी। वहीं नयना देवी के भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि वर्ष 2014 में 11 राज्यों में एम्स बनाए जाने की घोषणा हुई। इसमें हिमाचल को भी शामिल किया गया। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा की सोच थी। उस समय हिमाचल में कांग्रेस की सरकार थी। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सभी डीसी को जमीन तलाशने को लेकर पत्र लिखा था। बिलासपुर में जमीन को फाइनल किया गया।


 
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