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स्थगन प्रस्ताव से ढाई दिन सारा काम रोकने को जाना जाएगा सत्र
Sat, 19 Sep 2020 12:30 PM IST
अरविन्द ठाकुर
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 19 Sep 2020 12:30 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल की 13वीं विधानसभा का शुक्रवार को संपन्न हुआ नौवां सत्र कई कारणों से ऐतिहासिक बन गया। आम तौर पर मानसून सत्र पांच-छह बैठकों में ही निपट जाता था। इस सत्र के भी कोरोना संकट में असल में संक्षिप्त रहने की आशंका थी, पर यह रिकॉर्ड दस दिन निर्बाध चला। हिमाचल के इतिहास में पहली बार हुआ कि सत्ता पक्ष ने विपक्ष के लाए प्रस्ताव को चर्चा के लिए मंजूर किया।
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सात सितंबर को शुरू हुए इस सत्र के पहले दिन की बैठक में शामिल हुई विधायक रीता धीमान कोरोना पॉजीटिव निकलीं तो मंत्री महेंद्र सिंह और विधायक लखविंद्र सिंह राणा तो कोरोना संक्रमित होने के कारण सदन में ही नहीं पहुंच पाए। ऐसे में सदन के अंदर भी डर था कि कोरोना कहीं बाधा न बने, पर चौतरफा चौकसी में ऐसा नहीं हुआ।
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सदन में सारा काम रोककर कोरोना वायरस के मुद्दे पर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव लाया तो सरकार ने इस पर चर्चा मंजूर की। कोरोना संक्रमण में सरकार ने ऐसी अपूर्व चर्चा करवाना अपनी तौहीन नहीं मानी, बल्कि संकट की इस घड़ी में यह अपनी गंभीरता घोषित की। सदन में तमाम मुददों पर चर्चा हुई, पर सब पर कोरोना ही भारी रहा। सदन की कुल 10 बैठकों में 47 घंटे तक कार्यवाही चली।
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कुल 657 सवालों में 434 तारांकित और 223 अतारांकित सवाल पूछे गए। नियम-101 में दो गैर-सरकारी संकल्प और पिछले सत्र के संकल्प पर चर्चा के अलावा 12 विधेयकों को भी पारित किया गया। सरकार का विधानसभा के मानसून सत्र का दस दिन का यह संचालन संकट के इस दौर में सफल माना जा सकता है, क्योंकि लंबा सत्र ठीक से निपट गया।