ट्रिब्यूनल बहाली का फैसला अगर सही होता तो कांग्रेस पार्टी आज विपक्ष में न होती
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रशासनिक ट्रिब्यूनल बहाल करने का फैसला अगर सही होता तो आज कांग्रेस विपक्ष में न होती। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने ट्रिब्यूनल बंद करने का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया। इसको लेकर पहले मंत्री परिषद के सदस्यों के साथ लंबी बैठकें हुईं। उसके बाद कर्मचारी के बड़े वर्ग के साथ इस मामले में विस्तृत चर्चा हुई। उसके बाद ही इस विषय को आगे बढ़ाया गया। ट्रिब्यूनल बंद करने का आर्डिनेंस पहले पास हो चुका है। वीरवार को सिर्फ 21 हजार कर्मचारियों के मामलों को हाईकोर्ट में शिफ्ट करने पर फैसला लेना था। इसलिए एक्ट में प्रावधान करना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि देश के सिर्फ 6 राज्य में प्रशासनिक ट्रिब्यूनल है। ओडिसा ने एक महीने पहले ही इसे बंद कर दिया है। हिमाचल में इसे इसलिए बंद करना पड़ा, क्योंकि इसमें कर्मचारियों को राहत नहीं मिल रही थी। कर्मचारी भी यही चाह रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने ट्रिब्यूनल बहाल किया, लेकिन उस समय इसमें हजारों मामले लंबित पड़ गए। कर्मचारियों को कोई राहत नहीं मिल पाई है। अब इन मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में होगी और कर्मचारियों को जल्द न्याय मिलेगा।
ट्रिब्यूनल बंद करना कर्मचारियों से मजाक : वीरभद्र सिंह
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रशासनिक ट्रिब्यूनल बंद करने का निर्णय कर्मचारियों से भद्दा मजाक है। यह फैसला आनन-फानन में लिया गया। भाजपा की तानाशाह सरकार ने कर्मचारियों को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट में पहले ही मामले लंबित पड़े हैं। अब 21 हजार मामले और हाईकोर्ट में जा रहे हैं। इससे पेडेंसी और बढ़ेगी।
ट्रिब्यूनल में मुलाजिमों को मिल रहा था सस्ता न्याय : मुकेश
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रशासनिक ट्रिब्यूनल बंद करने का निर्णय कर्मचारियों के खिलाफ है। ट्रिब्यूनल में मुलाजिमों को सस्ता न्याय मिल रहा था। माकपा नेता राकेश सिंघा ने कहा कि कर्मचारियों को न्याय के लिए अब इंतजार करना पड़ेगा। ट्रिब्यूनल में समय पर कर्मचारियों की सुनवाई होती थी।