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हिमाचल प्रदेश: अपने करों से प्राप्त होने वाला राजस्व कम होने का अनुमान, वित्तीय संतुलन चुनौती

Mon, 23 Mar 2026 11:00 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 23 Mar 2026 11:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में राजस्व में  साल 2026-27 में गिरावट का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार 2026-27 में कर राजस्व में गिरावट यह संकेत देती है कि राज्य की आय में अस्थिरता बनी हुई है। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal Revenue from Own Taxes Projected to Decline; Fiscal Balance Poses a Challenge
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के बजट आंकड़ों के अनुसार राज्य के अपने कर राजस्व में साल 2026-27 में गिरावट का अनुमान लगाया गया है। वर्ष 2024-25 में कुल कर राजस्व 6,980.94 करोड़ रुपये रहा, जो 2025-26 में बढ़कर 9,368.48 करोड़ आंका जा रहा है, लेकिन 2026-27 के लिए यह घटकर 8,662.79 करोड़ रहने का अनुमान है।

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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से दिए गए बजट अनुमानों के आंकड़ों के अनुसार राज्य आबकारी सबसे बड़ा राजस्व स्रोत बना हुआ है, जो 2026-27 में 3,174.07 करोड़ यानी 36.64 प्रतिशत रहने का अनुमान है। 2025-26 में बेशक यह 3,256.20 करोड़ एकत्र होगा, मगर यह कुल कर राजस्व का करीब 34.76 प्रतिशत रहने जा रहा है। 2024-25 में यह 2,699.42 करोड़ रहा, जो कुल कर राजस्व का 38.67 प्रतिशत रहा।

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इसके अलावा सेल्स टैक्स वैट से 2,290.97 करोड़ रुपये यानी 26.45 प्रतिशत और वाहन कर से 1,068.72 करोड़ यानी 12.34 प्रतिशत की आय होने की उम्मीद है। बिजली पर कर एवं शुल्क में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा रही है, जो 2024-25 के 494.88 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में 852.05 करोड़ यानी 9.84 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। स्टांप व रजिस्ट्रेशन शुल्क से भी राजस्व बढ़कर 653.76 करोड़ होने का अनुमान है। 
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विशेषज्ञों के अनुसार 2026-27 में कर राजस्व में गिरावट यह संकेत देती है कि राज्य की आय में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में सरकार के सामने अपने राजस्व स्रोतों को मजबूत करने और वित्तीय संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी रहेगी।

बढ़ सकता है टैक्स का दायरा पर आम आदमी पर बोझ न पड़े
अर्थशास्त्री प्रो. एनके शारदा ने कहा कि जहां संभव हो, वहां टैक्स का दायरा और दरें दोनों को बढ़ाने से ही अपने करों से राजस्व बढ़ सकता है। इसका सरकार को प्रयास करना चाहिए। स्थानीय निकाय विशेष रूप से नगर निकायों के स्तर पर संसाधनों को नहीं बढ़ाया जा पा रहा है। हालांकि कर केवल ऐसे ही लगाए जाने चाहिए, जिनका आम आदमी पर बोझ नहीं पड़े। सब्सिडी को निगेटिव टैक्स माना जाता है। इसे आर्थिक दृष्टि से कमजोर परिवारों पर ही लक्षित करना चाहिए। आबकारी नीति में भी सुधार किया जा सकता है।

वेतन और पेंशन दोनों पर होगा चालू वित्त वर्ष से ज्यादा खर्च
वित्त वर्ष 2026-27 में कर्मचारियों के वेतन पर 14,721.55 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि 2025-26 में 14,716.65 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। 2024-25 में 13,827.34 करोड़ रुपये व्यय हुए थे। अगले बजट में पेंशन पर 10,493 करोड़ रुपये व्यय होंगे। चालू वित्त वर्ष में 10,322.94 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। 2024-25 में 9383.65 करोड़ रुपये व्यय हुए थे। दिहाड़ी पर 315.40 करोड़ रुपये व्यय होंगे, जो चालू वित्त वर्ष में 292.50 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। 2024-25 में 307.87 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। यानी वेतन पेंशन और दिहाड़ी पर खर्च पिछले वर्षों से अधिक बढ़ रहा है।
 

7,271.95 करोड़ ब्याज, 4900.34 करोड़ लोन का भुगतान करना होगा
बजट अनुमानों के अनुसार 7,271.95 करोड़ ब्याज और 4900.34 करोड़ रुपसे लोन का भुगतान करना होगा। चालू वित्त वर्ष में 6738.85 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में चुकता किए जा रहे हैं। 2026-27 में 6,260.93 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाया जाएगा। चालू वित्त वर्ष में 5840.14 और 2024-25 में 18,203.06 कराेड़ रुपये चुकता किए गए।

2024-25 में वास्तव में खर्च हुआ था 71,836.85 करोड़ रुपये का बजट
बेशक अगले बजट के लिए अनुमान 54,928.18 करोड़ रुपये हैं और चालू वित्त वर्ष के 58,514.31 करोड़ हैं, मगर 2024-25 में वास्तव में 71,836.85 करोड़ रुपये का बजट खर्च हुआ था, जबकि उस वक्त भी बजट अनुमान 58,444 करोड़ रुपये थे। इस हिसाब से वास्तविक बजट अगले वर्ष का भी इसी रफ्तार से बढ़ सकता है।

आज होगी बजट पर सामान्य चर्चा
मुख्यमंत्री सुक्खू की ओर से शनिवार को पेश किए गए बजट पर सोमवार को सामान्य चर्चा होगी। विपक्ष इस दौरान हंगामेदार रुख अपना सकता है। दो बजे शुरू होने जा रही बैठक में पहले एक घंटे में प्रश्नकाल होगा। तीन बजे के बाद बजट पर सामान्य चर्चा शुरू होगी। सदन में वैट संशोधन विधेयक को भी पारित करने का प्रस्ताव किया जाएगा। 
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