शीत सत्र: सरकार के खिलाफ विपक्ष ने पेश किया अविश्वास प्रस्ताव, स्पीकर ने किया खारिज
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री समेत कांग्रेस के सात विधायकों ने सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार ने अपना विश्वास खो दिया है। उपचुनाव में भाजपा चारों सीटों पर हार गई। सदन में प्रस्ताव पेश होते ही खारिज कर दिया गया।
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हिमाचल प्रदेश उपचुनावों में भाजपा की हार से उत्साहित विपक्षी दल कांग्रेस ने सत्र के पहले दिन विधानसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। इस दौरान जोरदार हंगामा हुआ और सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही ओर से हुए शोरगुल के बीच स्पीकर विपिन परमार ने नियमों का हवाला देते हुए अविश्वास प्रस्ताव को निरस्त कर दिया। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने शोकोद्गार के बाद सदन में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। अग्निहोत्री ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि मौजूदा जयराम सरकार अपना विश्वास खो चुकी है।
प्रदेश की जनता का इस सरकार पर कतई विश्वास नहीं रह गया है। उपचुनाव में सत्तादल भाजपा की करारी हार हुई है और जनता ने उसे नकार दिया है। अग्निहोत्री ने कहा कि अच्छा होता यदि मुख्यमंत्री उपचुनावों में हार के बाद सरकार भंग कर चुनाव का रास्ता प्रशस्त करते। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर सदन के भीतर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है, वहीं सदन के बाहर लगातार धरने प्रदर्शन हो रहे हैं और कोई भी वर्ग सरकार से खुश नहीं है।
स्पीकर ने व्यवस्था दी कि अविश्वास प्रस्ताव को सदन में पेश करने के लिए नियमों के तहत विपक्ष के पास न्यूनतम 23 सदस्यों का समर्थन होना चाहिए, लेकिन प्रस्ताव पेश करने के समय सदन में विपक्ष के केवल 18 सदस्य ही मौजूद थे। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव पेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सदन में सदस्यों की संख्या एक तिहाई न होने से वह अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करते हैं।
चर्चा से भाग रही सरकार : मुकेश
शीतकालीन सत्र के पहले दिन सदन में कांग्रेस पार्टी की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने के विरोध में विपक्ष ने सदन के बाहर आकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष प्रदेश के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करना चाहता है, लेकिन सरकार चर्चा से भाग रही है। कांग्रेस के 22 विधायकों के अलावा माकपा विधायक राकेश सिंघा ने भी इस प्रस्ताव के लिए समर्थन दिया था। सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए एक तिहाई बहुमत के बावजूद विस अध्यक्ष ने इस पर चर्चा नहीं होने दी। विस अध्यक्ष विपिन परमार ने सबको सदन में बात रखने की बात कही, लेकिन बाद में उन्होंने भी रूलिंग देनी शुरू कर दी।
उन्होंने कहा कि सरकार विश्वास मत खो चुकी है। उपचुनावों में मुख्यमंत्री के गृहक्षेत्र सहित चारों सीटों पर भाजपा की हार हुई है। हर कोने की जनता ने इन्हें नकारा है। उपचुनाव में हार के बाद केंद्र सरकार को मजबूरन डीजल और पेट्रोल के दाम घटाने और तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े। सरकार को जेसीसी की बैठक बुलाकर कर्मचारियों की मांगें माननी पड़ीं। अभी भी न पुलिस जवानों की वेतन विसंगतियों की सुनवाई हो रही है और न ही आउटसोर्स कर्मचारियों पर सरकार कोई नीति ला पाई है। रेत, शराब, वन, ट्रांसफर और ठेकेदार माफिया से प्रदेश में लूट का माहौल है। मुख्यमंत्री और इनके कैबिनेट मंत्रियों को पद पर रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार भारी-भरकम कर्जे ले रही है। उद्योगों के विकास के लिए कुछ नहीं किया गया। प्रदेश में कोई हवाई पट्टी, फोरलेन और रेल लाइन में विस्तार नहीं किया गया। सदन के बाहर धरने हो रहे हैं। विधायकों को समय पर विधानसभा तक पहुंचाने में भी सरकार नाकाम रही है। सरकार जब हर मोर्चे पर विफल हो गई तो विपक्ष की ओर से सदन में अविश्वास मत लाया गया। प्रस्ताव पेश करने के लिए हमारे पास सदन में पर्याप्त संख्या है। बावजूद इसके सदन में अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया।