तीन दिन जंगल में भटकते रहे भूखे प्यासे, आईटीबीपी और पुलिस ने बचाई जान
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ट्रैकिंग पर निकले थे लेकिन हमें क्या पता था कि जान पर बन आएगी। तीन दिन तक जंगल में भूखे प्यासे भटकते रहे। मामला हिमाचल के किन्नौर जिले की पिन वैली का है। पिन वैली में फंसे छह ट्रैकर सुरक्षित निकाल लिए हैं। आईटीबीपी और पुलिस कर्मचारियों की रेस्क्यू टीमों ने इन्हें सुरक्षित पहुंचाया।
ये ट्रैकर तीन दिन भूखे-प्यासे रहे। चार अन्य ट्रैकर जंगल में रास्ता भटक गए। नक्शा और खाने-पीने का सामान दो ट्रैकरों के पास था। दोनों काफी दूर निकल गए। ट्रैकरों के भटकने की सूचना एसडीएम भावानगर को शिमला पुलिस ने दी। इसके बाद आईटीबीपी और
पुलिस दल को रवाना किया गया। 25 जुलाई को मणिकर्ण के बरशैणी से पिन, पार्वती, जोत होकर काजा के लिए छह ट्रैकरों का दल निकला था। दल में कुल्लू के अमित, प्रवीण और साहिल, नेरचौक के चंदन, शिमला के विवेक और विपुल शामिल थे।
उफान पर थी खड्ड और यहीं से भटक गए
साहिल और चंदन नक्शा और खाने-पानी का सामान लेकर आगे निकल गए थे। दोनों शुक्रवार रात को छोटा कंबा गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि शोरंग खड्ड उफान पर होने के कारण अन्य चार ट्रैकर इसे पार नहीं कर पाए।
रस्सी और नक्शा न होने से चारों युवक भटक गए थे। जैसे-तैसे खड्ड को पार किया। कई घंटे इंतजार करते रहे, लेकिन प्रवीण, विवेक और विपुल नहीं आए। उन्हें ढूंढने के लिए दस किलोमीटर वापस लौटे, वे कहीं नहीं मिले।
चारों ट्रैकरों में से अमित भी रास्ता भटक गए थे। वह शुक्रवार रात को रूपी के मझगांव पहुंचे। अन्य सदस्य प्रवीण, विपुल और विवेक को शोरंग के जंगल से स्थानीय युवक, पुलिस और आईटीबीपी के जवान छोटा कंबा लाए। यहां मेडिकल चेकअप के बाद ट्रैकरों को घर भेजा जाएगा।
एसडीएम भावानगर सुरेंद्र मोहन ने बताया कि शुक्रवार रात को शिमला पुलिस से सूचना मिली कि पिन-पार्वती-जोत पर ट्रैकर भटक गए हैं। पुलिस के 15 और आईटीबीपी के 27 जवानों को इनकी तलाश के लिए भेजा। ट्रैकर साहिल और चंदन शुक्रवार रात 10.30 बजे छोटा कंबा पहुंचे थे। वहां से भावानगर होते हुए घर चले गए। सभी ट्रैकर सुरक्षित हैं।