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लैंडस्लाइड हादसा: प्रशासन ने किया होता ये काम तो बच जाती कई जानें

Wed, 16 Aug 2017 12:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कोटरोपी (मंडी)
ब्यूरो/अमर उजाला, कोटरोपी (मंडी) Updated Wed, 16 Aug 2017 12:12 PM IST
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himachal pradesh landslide on national high way in mandi side story

हिमाचल के मंडी जिले में हुए कोटरोपी हादसे में जिला प्रशासन की भारी लापरवाही सामने आई है। भूस्खलन के साथ पहाड़ गिरने का खतरा था इसीलिए उसकी जद में आने वाले गांव पहले ही खाली हो गए थे। लेकिन एनएच 154 को ईश्वर के भरोसे छोड़ दिया गया।

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बता दें हिमाचल के मंडी जिले में हुए लैंडस्लाइड हादसे में 48 लोगों की मौत हुई है। पहाड़ दरकने से यात्रियों से भरी दो बसें मलबे में दब गई थीं। मलबे के साथ एक बस के बहने के बाद भी पीछे आ रहे वाहनों को रोकने वाला कोई नहीं था।
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अगर एक पुलिस वैन भी रात में वहां ड्यूटी पर होती तो पीछे आ रहे कई और वाहन दोबारा आए मलबे की चपेट में नहीं बहते। और कई जाने बच जातीं। जिला प्रशासन का तर्क है कि एनएच पर यातायात को रोका नहीं जा सकता है।
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यह सामरिक महत्व से भी अहम है। मलबे में दबे रवां गांव के बाशिंदों की मानें तो पिछले साल भी जिला प्रशासन को उन्होंने इस बारे में सूचित किया था। बीते दिनों जब बरसात में पहाडिय़ों से पत्थर गिरे तो उन्होंने कई बार जंगल में शरण ली थी।

इस दौरान कई बार उन्हें वन विभाग ने यहां से हटाया है। इससे यह स्पष्ट है कि इन लोगों की समस्या और आपदा के बारे में प्रशासन को भी जानकारी थी। लेकिन, इस ओर प्रशासन ने संजीदगी नहीं बरती। घटना को महज एक लैंडस्लाइड समझ कर यहां पर बड़ी भूल गई। जिससे कई जिंदगियां तबाह हो गई। 

यहां पर नहीं था ऐसा कोई इंतजाम

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हिमाचल में परम्परा रही है कि पहाड़ दरकने की आशंका होने पर सड़क पर पुलिस जवानों को तैनात किया जाता है। वह कमजोर पहाड़ी के ऊपर से पत्थर या मलबा गिरने पर सीटे बजा कर दूसरी तरफ से आने वाले वाहनों को रोक देते हैं।

लेकिन यहां ऐसा कोई इंतजाम नहीं था। एक बस बह गई। थोड़ी देर बात दूसरी बस वहां पहुंच गई। टूटी सड़क और मलबा आने की गड़गहाट सुन ड्राइवर घबरा गया।

उसने नीचे उतरी सवारियों को दोबारा बस में बैठाया और बैक गियर में पीछे गाड़ी दौड़ाई। इसके बावजूद ये बस मलबे की चेपट में आ गई। इसी तरह रात में न जाने कितने वाहन इस मलबे की चपेट में आए।   

एक परिवार ने मवेशियों समेत पहले ही छोड़ दिया था घर
बताया जा रहा है कि रवां गांव को एक परिवार तो मवेशियों समेत जंगल में शरण ले ली थी। जिससे इस परिवार के मवेशी तथा जरूरी सामान दबने से बच गया है।

इससे यह अदांजा लगाया जा सकता था कि घटना का अंदेशा वन विभाग और प्रशासन को था। लेकिन, आशंका को दरकिनार किया गया। जिससे यह चूक त्रासदी बन गई।

डीसी बोले- लैंडस्लाइड की जानकारी थी

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डीसी मंडी संदीप कदम ने भी माना कि यहां पर लैंडस्लाइड की जानकारी थी। लेकिन, इतने बड़ी त्रासदी का किसी को अंदाजा नहीं था। ग्रामीणों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया गया है। एनएच पर यातायात रोकना मुश्किल है। यह सामरिक महत्व से भी अहम सड़क है। 

एसपी अशोक कुमार ने माना कि इस तरह के हादसे की आशंका पर पुलिस तैनात की जाती है। लेकिन न जिला प्रशासन न ग्रामीणों की तरफ से उन्हें भूस्खलन होने की आशंका की सूचना दी गई थी। वर्ना हम वहां रात में फोर्स जरूर लगाते। 

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