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566 करोड़ वसूल नहीं पाया बिजली बोर्ड, घाटे से जूझने को मजबूर
Fri, 12 Jun 2020 12:27 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 12 Jun 2020 12:27 PM IST
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राज्य बिजली बोर्ड अपनी लचर कार्यप्रणाली के चलते घाटे से जूझने को मजबूर है। करीब 1500 करोड़ के घाटे में चल रहा बिजली बोर्ड 566 करोड़ की लेनदारी में फिसड्डी साबित हो रहा है। जल शक्ति, नगर निकायों सहित कई अन्य सरकारी महकमों पर करीब 300 करोड़ का बिजली बिल बकाया है। इसके अलावा औद्योगिक, व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं से भी 237 करोड़ का बिल भी वसूल नहीं हो पा रहा है। लेनदारी में हो रही देरी को लेकर विद्युत नियामक आयोग ने बोर्ड प्रबंधन को सुस्त बिल वसूली प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
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विद्युत नियामक आयोग को सौंपी रिपोर्ट में बिजली बोर्ड ने बताया कि साल 2018-19 के दौरान 532 करोड़ के बिल वसूल नहीं हुए हैं। 28 करोड़ की राशि बीते पांच से वसूल नहीं हुई है। पांच साल से ज्यादा समय से साढ़े पांच करोड़ की वसूली देय है। सबसे अधिक लेनदारी जल शक्ति विभाग की है। जल शक्ति विभाग से 265 करोड़, नगर निकायों से साढ़े चार करोड़ और अन्य सरकारी विभागों से 20.61 करोड़ लिया जाना शेष है।
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इसके अलावा घरेलू उपभोक्ताओं से 80 करोड़, व्यावसायिक उपभोक्ताओं से 63 करोड़, औद्योगिक उपभोक्ताओं से 94 करोड़ और अन्य से 37 करोड़ की राशि अभी वसूल की जानी है। यह कुल राशि 566.29 करोड़ आंकी गई है। आयोग ने बोर्ड प्रबंधन को इस वसूली को करने के लिए पुख्ता योजना बनाते हुए कामकाज में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। आयोग का मत है कि सरकारी विभागों से की जाने वाली वसूली को लेकर सरकार के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा जाए। आयोग ने इस बाबत उठाए गए कदमों को लेकर भी बोर्ड प्रबंधन को रिपोर्ट जल्द सौंपने के निर्देश भी दिए हैं।
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