स्वास्थ्य: हिमाचल के अस्पतालों में शुरू हुआ सीवाई-टीबी टेस्ट, संक्रमण का खतरा पहले ही पहचानने में मिलेगी मदद
हिमाचल प्रदेश में टीबी की रोकथाम के लिए अस्पतालों में सीवाई-टीबी टेस्ट शुरू किया गया है। इंजेक्शन के जरिए होने वाली इस जांच का परिणाम 48 से 72 घंटे में मिलता है और इससे उच्च जोखिम वाले लोगों में टीबी संक्रमण की पहचान करने में मदद मिलती है।
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क्षय रोग (टीबी) के खिलाफ जंग में स्वास्थ्य विभाग को नई ताकत मिली है। अब सीवाई-टीबी टेस्ट के जरिये शरीर में मौजूद टीबी संक्रमण का समय रहते पता लगाकर बीमारी को सक्रिय होने से पहले ही रोका जा सकेगा। हिमाचल के अस्पतालों में शुरू हुई इस जांच से खासकर उच्च जोखिम वाले मरीजों को लाभ मिलेगा। जांच में संक्रमण के संकेत मिलने पर चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार प्रिवेंशन थेरेपी शुरू की जाएगी, जिससे टीबी की रोकथाम और हिमाचल को क्षय रोग मुक्त बनाने के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।
अब एक इंजेक्शन से शरीर के अंदरूनी हिस्से में छुपे क्षय रोग (टीबी) के संक्रमण का पता चल सकेगा। इसमें इंजेक्शन से शरीर में एंटीजन का घोल इंजेक्ट किया जाएगा। हालांकि, टेस्ट का सकारात्मक परिणाम आने का मतलब कतई नहीं है कि व्यक्ति को सक्रिय टीबी रोग निश्चित रूप से है। सक्रिय क्षय रोग का पता लगाने के लिए चिकित्सक लक्षणों के अनुसार बलगम की जांच, एक्सरे या अन्य परीक्षण करवाते हैं। दूसरी ओर सीवाई-टीबी टेस्ट का सबसे अधिक फायदा उच्च जोखिम श्रेणी में आने वाले लोगों को मिलेगा। साथ ही क्षय रोग होने से पहले ही लोगों को दवा से उपचार भी दिया जा सकेगा। इस टेस्ट में इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है।
क्यों है जरूरी
उच्च जोखिम श्रेणी यानी उच्च रक्तचाप, शुगर, अस्थमा, कैंसर, किडनी, हार्ट की बीमारी के मरीजों के साथ धूम्रपान करने वालों में टीबी का खतरा रहता है। अगर टीबी और उच्च जोखिम बीमारी में से कोई एक भी व्यक्ति को हो जाए तो परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में विभाग ने टीबी से बचाने के लिए पहले ही पता लगाने के तरीके को अपनाया है।
सीवाई-टीबी टेस्ट में 48 से 72 घंटे में लक्षण पता लग जाते हैं। इसमें इंजेक्शन वाली जगह पर त्वचा के सख्त उभरे हुए हिस्से को मिलीमीटर में मापा जाता है। यह जगह सख्त हो जाती है। चिकित्सक जांच के बाद के बाद पॉजिटिव होने पर व्यक्ति की प्रिवेंशन थेरेपी शुरू होती है। इसमें तीन माह तक दवा का कोर्स चलता है और हफ्ते में एक बार प्रिवेंशन थेरेपी लेनी पड़ती है।
प्रदेश को क्षय रोग मुक्त बनाने के लिए विभाग की ओर से दिन-रात कार्य किया जा रहा है। उच्च जोखिम श्रेणी के लोगों में क्षय रोग के खतरे को देखते हुए सीवाई-टीबी जांच की जा रही है। इससे भविष्य में होने वाले टीबी का पहले ही पता लग जाता है और दवाएं शुरू की जाती हैं। क्षय रोग से बचाने के लिए प्रिवेंशन थेरेपी बेहतर साबित हो रही है। -डॉ. यशपाल रांटा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, शिमला।