हिमाचल कैबिनेट: पहली कक्षा के छात्र 15 से, तीसरी से सातवीं के विद्यार्थी 10 नवंबर से आएंगे स्कूल
तीसरी से सातवीं कक्षा के विद्यार्थियों की 10 नवंबर से नियमित कक्षाएं शुरू होंगी। 15 नवंबर से पहली और दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों को स्कूलों में बुलाने का फैसला लिया गया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने अधिकांश राज्यों में सभी बच्चों के लिए स्कूल खोले जाने के बाद प्रदेश में भी 21 महीनों के बाद सभी छात्र-छात्राओं को स्कूल बुलाने का फैसला ले लिया है। बुधवार 10 नवंबर से तीसरी से सातवीं कक्षा तक के बच्चे स्कूल बुलाए जाएंगे। पहली और दूसरी कक्षा के बच्चे 15 नवंबर से बुलाए जाएंगे। यह निर्णय सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर लागू रहेगा।
स्कूलों को कोविड नियमों की सख्ती से अनुपालना करनी होगी और इंडोर क्षमता के 50 फीसदी बच्चे ही कक्षा में मौजूद रहेंगे। विद्यार्थियों के लिए स्कूल खोलने के बावजूद हर घर पाठशाला के तहत व्हाट्सएप के माध्यम से शिक्षण सामग्री भेजी जाएगी। शिक्षा विभाग ने खांसी, जुकाम और बुखार के लक्षण वाले विद्यार्थियों से स्कूलों में नहीं आने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि आठवीं से बारहवीं की कक्षाएं बीते 11 अक्तूबर से नियमित चल रही हैं।
मंत्रिमंडल की बैठक में बसों में सौ फीसदी सवारियां बैठाने को भी हरी झंडी दी गई है। सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक, राजनीतिक, खेल, मनोरंजन आदि से जुड़ीं गतिविधियों में 50 फीसदी क्षमता के साथ ही लोग जुट पाएंगे। उपचुनाव के बाद राज्य सचिवालय में सोमवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हिमाचल मंत्रिमंडल की बैठक हुई।
इसमें स्वास्थ्य, सामान्य प्रशासन आदि विभागों की ओर से कोविड, स्वर्णिम दृष्टिपत्र की घोषणाओं जैसे विषयों पर प्रस्तुतियां दी गईं। कैबिनेट ने एपीएमसी एक्ट में 131 से बढ़ाकर 259 वस्तुओं को शामिल करने का भी फैसला लिया है। इसमें अब अनाज, दालें, तिलहन, पशुधन आदि कई विक्रय योग्य वस्तुएं शामिल की गई हैं। इनकी खरीद में गड़बड़ी पर अब एपीएमसी एक्ट लागू होगा।
घर-घर जाकर दूसरी डोज लगाने के लिए किया जाएगा प्रेरित
कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज में भी नंबर वन आने के लिए प्रदेश सरकार ने घर-घर जाकर लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए जागरूक करने की योजना तैयार की है। सरकार ने 30 नवंबर तक हिमाचल प्रदेश के सौ फीसदी लोगों को दूसरी डोज देने का लक्ष्य रखा है। इसके चलते यह प्लान तैयार किया है। कोविड-19 की स्थिति और कोरोना वायरस की संभावित तीसरी लहर से निपटने की तैयारियों के संबंध में कैबिनेट की बैठक में प्रस्तुति भी दी गई।
स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने कैबिनेट में बताया कि 30 नवंबर तक हिमाचल में लक्षित सभी लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज लगाने का लक्ष्य रखा है। लोगों को घर-घर जाकर वैक्सीन लगाने का भी प्लान तैयार किया है। अभी तक प्रदेश में 65 प्रतिशत आबादी को कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज लगाई जा चुकी है। प्रदेश में 55 लाख 23 हजार पात्र लोग हैं। इनमें से 36,53,500 लोगों को दूसरी डोज लग चुकी है। किन्नौर जिले में 100 फीसदी लोगों को दूसरी डोज लग चुकी है।
अब फूल, औषधियों, मसालों की खोली जा सकेंगी अलग मंडियां
हिमाचल प्रदेश में अब फूलों, औषधियों आदि कई तरह के उत्पादों की अलग मंडियां खोली जा सकेंगी। स्ट्राबरी जैसे फल, पशु उत्पाद, मसाले, दालें, तिलहन आदि भी मंडियों में बेचे जा सकेंगे। प्रदेश मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है कि अब 131 की बजाय 259 वस्तुएं एपीएमसी एक्ट में शामिल होंगी। इनकी इसी कानून के तहत नियमानुसार खरीद-फरोख्त करनी होगी।
सोमवार को प्रदेश मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश कृषि और बागवानी उत्पाद विपणन (विकास व विनियमन) अधिनियम 2005 की वर्तमान अनुसूची में अधिक मदों को शामिल करने को मंजूरी दी है। अब इसमें अनाज, दालें, तिलहन, सब्जियों के रेशे, स्ट्राबरी जैसे फल, पशुपालन उत्पाद एवं पशुधन, मसाले, औषधीय और सुगंधित पौधों की प्रजातियां, फूल, गमलों में लगे पौधों और उनके बीज और अन्य उत्पादों सहित 259 वस्तुएं शामिल की गई हैं।
हिमाचल प्रदेश कृषि उत्पाद विपणन बोर्ड के प्रबंधक निदेशक नरेश ठाकुर ने कैबिनेट के इस फैसले को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जिस तरह से टापरी में अलग से किन्नौरी सेब की मंडी है। ठीक ऐसे ही स्ट्राबरी जैसे फलों, औषधीय पौधों, मसालों, दलहनों आदि की भी अब अलग से मंडियां खोली जा सकेंगी। सामान्य मंडियों में भी इन उत्पादों को बेचा जा सकेगा। कोविड काल में भी बहुत से उत्पादों को मंडियों में इसलिए नहीं बेचा या खरीदा जा सका, क्योंकि ये अधिसूचित नहीं थीं।
परवाणू में खोली जा रही पहली फूल मंडी
परवाणू में पहली फूल मंडी खोली जा रही है। इसे कृषि उत्पाद मंडी समिति (एपीएमसी) की ओर से खोला जा रहा है। हालांकि, फूल अभी तक एपीएमसी एक्ट के तहत अधिसूचित वस्तु नहीं थी, मगर आगे से यह इस सूची में शामिल हो गया है। अभी तक फूलों के लिए अधिसूचित मंडियां राज्य से बाहर हैं। अब राज्य के भीतर भी खोली जा सकेंगी।