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कमांडो ट्रेनिंग से लेकर कम्यूनिटी पुलिसिंग तक सीखेंगे नए रंगरूट

Fri, 08 Jul 2016 01:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 08 Jul 2016 01:16 PM IST
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himachal police constables will go for commando training

अब तक सिर्फ शारीरिक क्षमता और कानूनी कार्रवाई की जानकारी हासिल करने वाले पुलिस कर्मियों को स्मार्ट पुलिस के रूप में तैयार किया जाएगा। पुलिस कर्मी की विवेचना और कानून व्यवस्था की क्षमता के साथ उनमें सॉफ्ट स्किल्स, कम्यूनिटी पुलिसिंग और आपदा की स्थिति में डिजास्टर मैनेजमेंट भी करना सिखाया जाएगा। प्रदेश में 1500 कांस्टेबल के लिए चल रही भर्ती में चयनित रंगरूटों के लिए इसी साल से ये बदलाव लागू होंगे।

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आला अधिकारियों ने बेसिक्स पर फोकस किया है। नए रंगरूटों को ट्रेनिंग के दौरान ओवरआल डेवलपमेंट के लिए कांस्टेबल ट्रेनिंग के प्रोग्राम में बदलाव किए हैं। इस बार आधा दर्जन से ज्यादा विषय शामिल किए गए हैं। इनमें ट्रैफिक मैनेजमेंट, कम्यूनिटी पुलिसिंग, कमांडो ट्रेनिंग, डिजास्टर मैनेजमेंट, सॉफ्ट स्किल, टेक्नालॉजिकल अवेयरनेस शामिल हैं। खास बात यह है कि ट्रेनिंग कोर्स में इन नए विषयों को लाने के बाद भी ट्रेनिंग के समय को नहीं बढ़ाया गया है।
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इसलिए पड़ी ट्रेनिंग में बदलाव की जरूरत

himachal police constables will go for commando training

ट्रेनिंग के दौरान पुलिस कर्मियों को सिर्फ पुलिसिंग के बेसिक काम जैसे विवेचना करना, मुंशी का काम करना, परेड, आर्म्ड ट्रेनिंग ही दी जाती थी। उन्हें पुलिस के अन्य काम जैसे काउंसलिंग, टीम लीड करना, बतौर कमांडो पोस्टिंग, वीआईपी सिक्योरिटी में लगाया

जाता या छोटी टीम को लीड करने को कहा जाता तो परेशानी का सामना करना पड़ता है। एडीजीपी ट्रेनिंग एसआर ओझा ने बताया कि इन्हीं परेशानियों को देखते हुए कोशिश की जा रही है कि उन्हें पुलिसिंग से जुड़े हर काम के लिए पहले से ही बेसिक ट्रेनिंग दी जाए।

सॉफ्ट स्किल और कम्यूनिटी पुलिसिंग पर जोर

कुछ समय में आला अधिकारियों के लिए सबसे ज्यादा परेशानी पुलिस कर्मियों की पब्लिक डीलिंग रही है। कई शिकायतें अधिकारियों के सामने आईं। इनमें पुलिस कर्मी की ओर से पीड़ित या शिकायतकर्ता से सही तरीके से बातचीत न करने करना शामिल था। ऐसे में

आला अधिकारियों का सबसे ज्यादा जोर सॉफ्ट स्किल और कम्यूनिटी पुलिसिंग पर रहेगा। आईजी ट्रेनिंग हिमांशु मिश्रा ने बताया कि कोशिश रहेगी कि ट्रेनिंग के दौरान थाने-चौकी पर आने वाले पीड़ित या शिकायतकर्ता से कैसे मिलें या बात करें, इसकी भी जानकारी दी जाएगी। पुलिस कैसे पब्लिक की मदद लेकर बेहतर काम कर सकती है, इस बारे में भी उदाहरणों सहित बताया जाएगा।

 

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