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हिमाचल: अब रेडियो से भी जल्द शुरू होगी घर बैठे विद्यार्थियों की पढ़ाई

Thu, 16 Apr 2020 04:10 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 16 Apr 2020 04:10 PM IST
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Himachal: Now students study will start at their home on radio
रेडियो - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल में स्कूली विद्यार्थियों की पढ़ाई जल्द रेडियो से भी शुरू होगी। शिमला एफएम ने शिक्षा निदेशालय को एक घंटे का स्लॉट देने की हामी भरी है। दूरदर्शन और व्हाट्सऐप के साथ अब रेडियो से भी विद्यार्थियों को पाठ पढ़ाए जाएंगे। रेडियो के माध्यम से विद्यार्थियों को कक्षावार और विषयवार पढ़ाई करवाई जाएगी। बच्चों को होमवर्क नोट करवाया जाएगा। फोन इन प्रोग्राम के माध्यम से बच्चों की शंकाओं से संबंधित सवाल अलग से पूछे जाएंगे। एक घंटे के कार्यक्रम के दौरान इन सवालों के जवाब दिए जाएंगे। पढ़ाई में बच्चों को व्यस्त रखने के लिए रेडियो का भी इस्तेमाल करने का फैसला लिया गया है। हालांकि, इस तकनीक को कब से शुरू किया जाएगा। यह अभी प्रदेश सरकार के विचाराधीन है। सरकार से मंजूरी मिलते ही इस तकनीक से भी पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी।
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10वीं और 12वीं की दूरदर्शन पर लगेगी तीन घंटे की क्लास
शिमला। 10वीं और 12वीं कक्षा के करीब दो लाख विद्यार्थियों की शुक्रवार से दूरदर्शन के माध्यम से पढ़ाई शुरू करवा दी जाएगी। हर घर पाठशाला अभियान के तहत अब रोजाना सुबह 10 से एक बजे तक दूरदर्शन के स्थानीय चैनल से इन दोनों कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई करवाई जाएगी। गुरुवार को इसका ट्रायल किया गया। ट्रायल के दौरान कुछ विषयों के वीडियो प्रसारित किए गए। उधर, नौवीं, 10वीं और 12वीं कक्षा की व्हाट्सऐप के माध्यम से पढ़ाई का ट्रायल भी वीरवार से शुरू हो गया है। तीन दिनों तक विद्यार्थियों को ड्रांइग और कोरोना वायरस से बचाव की सामग्री भेजी जाएगी। बीस अप्रैल से सिलेबस से संबंधित डिजिटल सामग्री भेजी जाएगी।
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पहली से आठवीं तक व्हाट्सऐप से सिलेबस से जुड़ा होमवर्क भेजना शुरू

समय 10 से 12 वाला, हर घर बने पाठशाला अभियान के तहत वीरवार से पहली से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों की पढ़ाई भी आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई। अभियान के पहले दिन करीब डेढ़ लाख विद्यार्थियों को व्हाट्सऐप के माध्यम से शिक्षण सामग्री भेजी गई।

ऑनलाइन पढ़ाई के लिए तैयार की गई माइक्रो वेबसाइट पर भी गुरुवार शाम तक करीब 19 लाख व्यूज पाए गए। इस वेबसाइट से अभिभावक बच्चों की पढ़ाई संबंधित सामग्री को डाउनलोड कर सकते हैं।

ऑनलाइन कोर्स से बाहर कर दिए एसएमसी शिक्षक

वहीं, एसएमसी शिक्षकों को सरकार ने ऑनलाइन पढ़ाई से भी बाहर कर दिया है। कोरोना संकट के बीच इन शिक्षकों को नए काम में शामिल नहीं किया गया है। शिक्षकों ने मामले की शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कर उनकी सेवाएं जारी रखने की मांग की है। एसएमसी अध्यापक संगठन के अध्यक्ष मनोज रोंगटा ने कहा कि 31 मार्च को 2630 एसएमसी अध्यापकों का सेवाविस्तार खत्म हो चुका है। ये शिक्षक आठ सालों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे थे। समस्त नियुक्तियां पूर्व भाजपा सरकार ने 2012 में की थीं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के विधानसभा क्षेत्र में करीब 200 एसएमसी अध्यापक कार्यरत हैं। महासचिव पीतांबर शास्त्री, टिका राम, पवन, राजेश भारत, संदीप तथा 12 जिला के अध्यक्षों ने कहा कि वर्तमान सरकार अपने चुनावी वायदे से मुकर रही है।  भाजपा ने घोषणापत्र में एसएमसी अध्यापकों की समस्याओं के समाधान की बात कही है।

वर्तमान में 200 से अधिक स्कूल एसएमसी के सहारे हैं। इनमें लाहौल-स्पीति, पांगी, भरमौर, शिमला, सिरमौर, चंबा, मंडी और किन्नौर में ज्यादा स्कूल हैं। एसएमसी अध्यापकों ने बिना अवकाश के पिछले आठ वर्षों से ऐसे स्कूलों में सेवाएं दी हैं, जहां नियमित शिक्षक जाने से गुरेज करते थे। एसएमसी शिक्षकों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। ये अध्यापक बिना सेवाविस्तार और मानदेय स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं। संघ ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज से मांग की है कि एसएमसी अध्यापकों को इस कोरोना महामारी के दौरान मानवीय आधार पर सेवा विस्तार दिया जाए। स्कूलों में ऑनलाइन छात्रों को न पढ़ाने के निदेशक उच्च के आदेश को निरस्त कर एसएमसी अध्यापकों को छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाने के आदेश देने की अधिसूचना जारी की जाए। तीन महीने से रुका हुआ वेतन भी जारी किया जाए।

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