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कोरोना काल में 15 ऑपरेटरों ने बेच दीं निजी बसें, 45 मनरेगा में कर रहे मजदूरी
Mon, 20 Jul 2020 10:56 AM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 20 Jul 2020 10:56 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना काल में प्रदेश के निजी बस ऑपरेटर बेहाल हैं। सवारियां न मिलने से ऑपरेटरों को डीजल का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। 15 ऑपरेटरों ने अपनी बसें बेच दी हैं तो 45 मनरेगा में दिहाड़ी लगा रहे हैं। हिमाचल में निजी ऑपरेटरों की 3100 बसें हैं। 600 ऑपरेटरों की बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं जबकि अन्य ने खड़ी कर दी हैं। प्रदेश सरकार ने बीती कैबिनेट बैठक में 25 फीसदी किराया बढ़ाने पर अपनी सहमति दी है। लेकिन चौतरफा विरोध के बाद प्रदेश सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी नहीं की।
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अब 20 जुलाई को कैबिनेट की बैठक में फिर से इस मामले को लाया जा रहा है। निजी बस ऑपरेटर के महासचिव रमेश कंवल ने बताया कि ऑपरेटरों की हालत खस्ता हो गई है। ऑपरेटर बसें बेच रहे हैं। कई ऑपरेटर शिमला छोड़कर अपने गांवों में मनरेगा की दिहाड़ी लगा रहे हैं। उधर, परिवहन विभाग के निदेशक कैप्टन जेएम पठानिया ने भी बताया कि कुछेक ऑपरेटरों ने बसें बेची हैं। कई मनरेगा में दिहाड़ी लगा रहे हैं। यूनियन ने इसकी सूचना दी है।
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जिला कांगड़ा के बडोह के सुनही निवासी बस ऑपरेटर राजीव कुमार शर्मा ने बताया कि परिवार की खातिर मनरेगा में दिहाड़ी लगा रहे हैं। यात्री न मिलने पर बस को घर के नीचे सड़क पर खड़ा कर दिया है। डीजल महंगा हो गया है। बसें चलाना घाटे का सौदा है।
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कांगड़ा जिला की बडोह तहसील के महावीर सिंह ने बताया कि ढाई महीने मनरेगा में दिहाड़ी लगाई। अब वह एक निजी मकान में मिस्त्री के साथ मजदूर का काम करके 500 रुपये दिहाड़ी ले रहे हैं। हालत यह है कि गांव में मजदूरी का काम भी नहीं मिल रहा है।