फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal News: Organic shawl costs 1.5 lakh rupee in Mandi Himachal Pradesh

मंडी के शिल्प गुरु ने तैयार की आर्गेनिक शाल, कीमत 1.5 लाख

Mon, 15 Mar 2021 11:08 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, मंडी
अमर उजाला नेटवर्क, मंडी Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 15 Mar 2021 11:08 AM IST
सार

  • रेशम, ऊन के साथ अखरोट, हरड़, रतनजोत, अनारदाना के छिलके और मंजिष्ठा के प्राकृतिक रंगों का किया इस्तेमाल
  • दो शाल दिल्ली भेजीं, तीसरी अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में बनी आकर्षण का केंद्र, छह माह में तैयार हुई एक शाल

विज्ञापन
Himachal News: Organic shawl costs 1.5 lakh rupee in Mandi Himachal Pradesh
शिल्प गुरू अवार्ड से सम्मानित ओपी मल्होत्रा आर्गेनिक शाल के साथ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आधुनिक दौर की केमिकल और सिंथेटिक वूल की चमकीली फैशन इंडस्ट्री में मंडी की रेशम और ऊन से तैयार आर्गेनिक (जैविक) शाल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में धूम मचाने के लिए तैयार है। यह शाल पूरी तरह आर्गेनिक है और इसकी कीमत 1.5 लाख रुपये है। इस पर अखरोट, हरड़, रतनजोत, अनारदाना का छिलका और मंजिष्ठा जड़ी-बूटी से बने प्राकृतिक रंग चढ़ाए गए हैं। दो शाल दिल्ली भेजी गई हैं जबकि तीसरी अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। 

विज्ञापन


वर्ष 2015 में हैंडलूम के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए शिल्प गुरू अवार्ड से सम्मानित ओपी मल्होत्रा के सानिध्य में मंडी के दो कारीगरों ने इस शाल को तैयार किया है। एक शाल बनाने में छह माह से अधिक समय लगा है। मल्होत्रा ने बताया कि अभी तक तीन शाल ही तैयार की गई हैं। दो शाल दिल्ली के फैशन डिजाइनर को भेजी गई हैं। इस शाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैशन शो में शामिल करने की कोशिश की जा रही है। तीसरी शाल प्रशासन की ओर से मंडी के अतीत को दर्शाने वाली रीलिव द पास्ट प्रदर्शनी में रखी गई है। 
विज्ञापन


दिल्ली म्यूजियम की शोभा बढ़ा रहा मंडी का चरखा
नई दिल्ली स्थित कनाट प्लेस में मंडी में बना हैरिटेज चरखा म्यूजियम की शान बढ़ा रहा है। मंडी की अंशुल मल्होत्रा ने इस चरखे को दान किया है। अंशुल शिल्प गुरू अवार्डी की बेटी हैं। उन्होंने बताया कि इस चरखे को 1957 में बनाया गया है। अब यह चरखा देश-विदेश के सैलानियों को आकर्षित कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


आधुनिक दौर में इस तरह के जैविक उत्पादों का अपना ही महत्व है। प्रशासन इसके लिए हर संभव मदद कलाकारों और कारीगरों की कर रहा है। ऐसे चुनिंदा जैविक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाने के लिए मदद की जाएगी। - ऋग्वेद ठाकुर, मंडी जिला के उपायुक्त

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed