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हिमाचल: आईजीएमसी में बनेगा मातृ-शिशु अस्पताल, संभावनाएं तलाशने के लिए कमेटी गठित

Tue, 05 May 2026 09:33 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 05 May 2026 09:33 PM IST
सार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर आईजीएमसी में एकीकृत मातृ एवं शिशु अस्पताल स्थापित करने की संभावनाओं का पता लगाने के निर्देश दिए हैं।

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Himachal: CM Sukhu Directs Exploration of Possibility to Establish Integrated Maternal and Child Hospital at I
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अधिकारियों के साथ की बैठक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर आईजीएमसी में एकीकृत मातृ एवं शिशु अस्पताल स्थापित करने की संभावनाओं का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सचिव आशीष सिंहमार के नेतृत्व में एक समिति गठित करने के निर्देश दिए। यह समिति इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में इस इकाई की स्थापना के लिए उपयुक्त स्थान का चयन करेगी, ताकि इसका प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य मरीजों को एक ही छत के नीचे विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने मेडिकल कॉलेजों में नैदानिक सेवाओं में मरीजों के लिए प्रतीक्षा अवधि को शून्य करने के लिए भी स्वास्थ्य विभाग को सुझाव देने को कहा। 

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उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य संस्थानों में उन्नत एवं उच्च स्तरीय मशीनें और उपकरण स्थापित कर रही है और बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त स्टाफ भी उपलब्ध करवा रही है। उन्होंने कहा कि नैदानिक प्रणाली को उन्नत करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है, क्योंकि यह मरीजों की बीमारियों की सही पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित होती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सा, पैरामेडिकल और तकनीकी स्टाफ के पद भी सृजित कर रही है। बैठक में सचिव आशीष सिंहमार, विशेष सचिव स्वास्थ्य जितेंद्र सांजटा, इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. सीता ठाकुर उपस्थित रहे।

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मरीजों को भागदौड़ से मिलेगा छुटकारा
 सचिव आशीष सिंहमार ने कहा कि स्थान चयन करने के लिए आईजीएमसी का दौरा किया जाएगा। दोपहर बाद आईजीएमसी और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया गया है। वार्डों को शिफ्ट करने से मरीजों को एक छत के नीचे सारी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी।

 

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सुर्खियों में रहा है केएनएच के गायनी वार्ड को शिफ्ट करने का मामला
 कमला नेहरू अस्पताल से गायनी ओपीडी और वार्ड को आईजीएमसी शिफ्ट करने का मामला काफी सुर्खियों में रहा है। इसको लेकर लोगों ने वार्ड शिफ्ट करने के मामले में प्रदर्शन भी किए हैं। इन्होंने मांग की थी कि गायनी और प्रसूति विभाग को एक ही छत के नीचे रखा जाए ताकि महिलाओं को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल न जाना पड़े। इसके बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को स्वास्थ्य अधिकारियों की बैठक बुलाई और आईजीएमसी परिसर में ही उचित स्थान उपलब्ध स्थान चयनित करने के निर्देश दिए।
 

एरोसिटी परियोजना के लिए मुआवजा दरों का हो पुनर्निर्धारण : केवल
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मंगलवार को सचिवालय में उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने गगल एयरपोर्ट के समीप प्रस्तावित एरोसिटी परियोजना के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि जिला प्रशासन द्वारा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। एयरपोर्ट के समीप के क्षेत्र की वर्तमान दर लगभग 24 लाख रुपये प्रति कनाल है। उप मुख्य सचेतक ने मुख्यमंत्री से प्रभावित क्षेत्र के लोगों को उचित मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए दरों का पुनर्निर्धारण करने का आग्रह किया ताकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी हो सके। इस अवसर पर एरोसिटी परियोजना के संभावित लाभों पर भी चर्चा की गई। इस परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे तथा अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का आश्वासन देते हुए कहा कि सरकार प्रभावित लोगों के हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है और उचित मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

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