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हिमाचल: मंडी काॅलेज को हाईकोर्ट से राहत, बीएड कोर्स में प्रवेश देने के लिए मिली अनुमति

Wed, 03 Sep 2025 12:15 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 03 Sep 2025 12:15 PM IST
सार

 अदालत ने कहा कि यह अनुमति रिट याचिका के अंतिम फैसले के अधीन होगी। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने एनसीटीई और अन्य संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि वह तत्काल इस अंतरिम आदेश पर कार्रवाई करें और आम जनता को सूचित करें कि न्यायालय ने याचिकाकर्ता संस्थान को काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति दे दी है। 

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Himachal: Mandi College gets relief from High Court, gets permission to give admission in B.Ed course
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एसोसिएशन (एनसीटीई) और अन्य प्रतिवादियों को अंतरिम निर्देश दिए हैं कि वह एक उच्च शिक्षा संस्थान को बीएड पाठ्यक्रम में छात्रों के प्रवेश के लिए चल रही काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति दें। अदालत ने कहा कि यह अनुमति रिट याचिका के अंतिम फैसले के अधीन होगी। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने एनसीटीई और अन्य संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि वह तत्काल इस अंतरिम आदेश पर कार्रवाई करें और आम जनता को सूचित करें कि न्यायालय ने याचिकाकर्ता संस्थान को काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति दे दी है। अदालत ने इस मामले में सभी प्रतिवादियों को 6 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है उसके बाद ही मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा।

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याचिकाकर्ता उच्च शिक्षा संस्थान ने अदालत को बताया कि नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन की ओर से उनके संस्थान की मान्यता रद्द करने का आदेश जारी किया गया था। संस्थान ने इस आदेश के खिलाफ अपीलीय प्राधिकरण में अपील दायर की। अपीलीय प्राधिकरण ने 12 मार्च 2025 के आदेश के माध्यम से मामले को फिर से सुनवाई के लिए एनसीटीई को वापस भेज दिया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि कानून के अनुसार जब अपीलीय प्राधिकरण किसी मामले को वापस भेजता है तो मूल आदेश स्वत: ही रद्द हो जाता है। इसका मतलब है कि जब तक एनसीटीई की ओर से कोई नया आदेश पारित नहीं किया जाता, तब तक संस्थान को मान्यता प्राप्त मानी जानी चाहिए। हालांकि एनसीटीई और अन्य संबंधित अधिकारी संस्थान को चल रही बीएड काउंसिल में भाग लेने की अनुमति नहीं दे रहे थे जिससे संस्थान और छात्रों को भारी नुकसान हो रहा था।

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