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महिला आत्महत्या मामला: हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, सरकार से पूछा- क्या कार्रवाई की

Fri, 25 Sep 2020 08:57 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 25 Sep 2020 08:57 PM IST
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Himachal High Court sought action taken report from State in a suicide case by a covid patient lady in Rippen Hospital
सांकेतिक तस्वीर

हिमाचल हाईकोर्ट ने जिला शिमला के रिपन अस्पताल (डीडीयू) में कोरोना संक्रमित महिला के आत्महत्या मामले में संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि इस मामले में अभी तक क्या कार्रवाई की गई है। मुख्य न्यायाधीश लिंगप्पा नारायण स्वामी और न्यायाधीश अनूप चिटकारा की खंडपीठ ने कोर्ट के नाम लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए उपरोक्त आदेश दिए।

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गौरतलब है कि बीते मंगलवार रात को चौपाल की 54 वर्षीय कोरोना संक्रमित महिला ने अस्पताल में आत्महत्या कर ली थी। कोर्ट ने मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि सरकारी अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीज का आत्महत्या जैसा कदम उठाना चिंतनीय है। इस मामले पर अब अगले सप्ताह सुनवाई होगी।

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डॉक्टरों की कमी पर हाईकोर्ट में सीएस और एसीएस स्वास्थ्य तलब 

प्रदेश के स्वास्थ्य केंद्रों में मेडिकल स्टाफ की कमी के मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव को शनिवार को अदालत में उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं। शनिवार को अदालत के लिए गैर कार्य दिवस है, लेकिन विशेष रूप से इस मामले के लिए मुख्य न्यायाधीश लिंगप्पा नारायण स्वामी और न्यायाधीश अनूप चिटकारा की खंडपीठ ने ये आदेश दिए। जनहित में दायर किए गए मामले में मेडिकल स्टाफ की कमी के मुद्दे पर प्रकाश डाला गया है। सुनवाई के दौरान सरकार के उठाए कदमों के बारे में बताया गया। कोर्ट को बताया गया कि स्वास्थ्य केंद्रों सहित कोर्ट में सूची दायर कर दी है।

हालांकि, प्रार्थी की ओर से कहा गया कि स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों की भारी कमी है। इसके लिए उठाए गए कदम पर्याप्त नहीं हैं। भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों के दिशा-निर्देशों के अनुसार भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कर्मचारियों की कमी है। अदालत ने दविंदर शर्मा की जनहित याचिका पर ये आदेश पारित किए। इसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र घणाहट्टी (शिमला) में मेडिकल स्टाफ की कमी को उजागर किया है। जनहित में दायर याचिका का विस्तार करते हुए कोर्ट ने राज्य के पीएचसी में डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपलब्धता के बारे में जानकारी मांगी थी।

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