'सरकार बताए किसे दी जमीन, नहीं तो CBI जांच'
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हिमाचल हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों को नौतोड़ भूमि आवंटन के मामले में नया मोड़ आ गया है। प्रदेश सरकार के नकारात्मक रवैये पर नाराज कोर्ट ने अब तक सरकारी कर्मचारियों को आवंटित नौतोड़ भमि का ब्योरा मांगा है।
अदालत ने राज्य सरकार को 8 जनवरी, 2015 को पारित आदेशों का अनुपालन करने के लिए दो हफ्ते का और वक्त दिया है। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश सरकार दो सप्ताह के भीतर 8 जनवरी के आदेशों की अनुपालना नहीं करती है तो अदालत इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपेगी।
कोर्ट ने से पूछा ऐसे कितने सरकारी कर्मचारी
अपने पिछले आदेशों में हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को आदेश दिए थे कि वह शपथपत्र के माध्यम से अदालत को अवगत करवाए कि प्रदेश में कितने क्लास वन अफसरों, कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नौतोड़ भूमि आवंटित की गई है।
अदालत ने मुख्य सचिव से पूछा था कि प्रदेश में ऐसे कितने सरकारी कर्मचारी हैं, जिन्हें नौतोड़ भूमि का आवंटन किया गया। कोर्ट ने इन सभी कर्मचारियों के नाम और पते सहित शपथपत्र के माध्यम से पूरी जानकारी तलब की थी। किन्नौर जिला के चगांव निवासी नरेंद्र लाल नेगी ने याचिका दायर की थी।
पहले जमीन दी बाद में रद्द कर दी
याचिका में आरोप लगाया था कि कि उसे 0.79 हेक्टेयर नौतोड़ भूमि का आवंटन किया था, लेकिन बाद में इसे यह कहकर रद्द कर दिया गया कि प्रार्थी सरकारी कर्मचारी है। पिछले आदेशों में अदालत ने मुख्य सचिव से पूछा था कि हिमाचल प्रदेश नौतोड़ नियम-1968 के तहत क्या सरकारी कर्मचारियों को भूमि दी जा सकती है या नहीं।
मुख्य सचिव ने शपथपत्र के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया है कि सरकारी कर्मचारियों को नौतोड़ भूमि का आवंटन किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि नौतोड़ नियमों के अनुसार सरकारी कर्मचारी को भूमि का आवंटन नहीं किया जा सकता। नौतोड़ भूमि केवल भूमिहीन और घर विहीन व्यक्तियों को ही आवंटित की जा सकती है।