{"_id":"46f90cd7ab5663ae7ffcb57c375b4023","slug":"himachal-high-court-seeks-report-from-additional-chief-secretary-education-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आदेशों की अनुपालना न करने पर एसीएस तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आदेशों की अनुपालना न करने पर एसीएस तलब
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 30 Jul 2015 12:45 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अदालती आदेशों की अनुपालना न करने के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा को अदालत के समक्ष पेश होने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने प्रार्थी शीला चंदेल की ओर से दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा को 23 सितंबर को अदालत में तलब किया है।
विज्ञापन
याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थी ने संशोधित वेतन दिए जाने की गुहार को लेकर याचिका दायर की थी। अदालत ने 8 जनवरी, 2014 को पारित आदेशों के तहत प्रतिवादी को आदेश दिए थे कि वह 31 जुलाई, 2014 तक प्रार्थी के मामले पर विचार करे। दिसंबर 2014 तक जब कोई भी कार्यवाही नहीं की गई तो प्रार्थी ने हाईकोर्ट के समक्ष अवमानना याचिका दायर की।
विज्ञापन
अदालत ने प्रतिवादी को एक बार फिर 6 सप्ताह का समय दिया, लेकिन सरकार ने प्रार्थी के मामले में कोई निर्णय नहीं लिया। मजबूरन प्रार्थी को दूसरी अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी। इस याचिका की सुनवाई करते हुए अदालत ने एक बार फिर प्रतिवादी को 6 सप्ताह का अतिरिक्त समय देते हुए 23 सितंबर को अदालती आदेशों के अनुपालना न होने की स्थिति में अदालत में समक्ष पेश होने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
मैकलोडगंज में अवैध पेड़ कटान पर मांगा जवाब- मैकलोडगंज में पेड़ों के अवैध कटान के मामले में कोर्ट मित्र ने विस्तृत रिपोर्ट पेश कर दी है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि आगामी 19 अगस्त तक रिपोर्ट का जवाब दायर करे। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने यह आदेश मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए पारित किए।
इसी मामले में अदालत को सीडी के साथ एक शिकायत पत्र भेजा गया, जिसमें कहा गया है कि अदालती आदेशों के बावजूद इस इलाके में धड़ल्ले से पेड़ काटे जा रहे हैं। कारण पूछे जाने पर बताया जा रहा है कि उन्होंने पहले से ही पेड़ काटने की स्वीकृति ली है। अदालत ने पेड़ों को काटने के बारे में दी गई सभी स्वीकृति पर भी स्थगन आदेश पारित किया है। मामले की आगामी सुनवाई 19 अगस्त को निर्धारित की गई है।