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Himachal: हाईकोर्ट ने कहा- आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी को सामान्य श्रेणी में नहीं किया जा सकता शिफ्ट

Tue, 06 Jan 2026 11:21 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 06 Jan 2026 11:21 AM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि यदि किसी आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार ने चयन प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर छूट (रिलैक्स स्टैंडर्ड) लाभ उठाया है तो उसे बाद में सामान्य श्रेणी की सीटों पर समायोजित नहीं किया जा सकता है।

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Himachal High Court said that a candidate from the reserved category cannot be shifted to the general category
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सहायक अभियंता (विद्युत) भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार ने चयन प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर छूट (रिलैक्स स्टैंडर्ड) लाभ उठाया है तो उसे बाद में सामान्य श्रेणी की सीटों पर समायोजित नहीं किया जा सकता है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कानून अब पूरी तरह स्थापित हो चुका है कि आरक्षित श्रेणी के वे उम्मीदवार जो किसी भी स्तर पर रियायती मानकों जैसे उम्र, अनुभव या कट-ऑफ में छूट का लाभ लेते हैं, वे सामान्य श्रेणी की रिक्तियों के लिए विचार किए जाने के पात्र नहीं रह जाते।

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अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड के मुताबिक याचिकाकर्ता ने स्क्रीनिंग टेस्ट के दौरान ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए निर्धारित कम अंकों की छूट का लाभ उठाया था। चूंकि उन्होंने इस स्तर पर श्रेणीगत छूट का लाभलिया था, इसलिए उन्हें बाद में सामान्य श्रेणी की सीटों पर माइग्रेट नहीं किया जा सकता था। यह मामला हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से वर्ष 2022 में विज्ञापित सहायक अभियंता (इलेक्ट्रिकल) के 76 पदों से संबंधित है। याचिकाकर्ता आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग श्रेणी से थी, जिसने चयन प्रक्रिया को चुनौती दी थी। तर्क था कि एक अन्य चयनित उम्मीदवार को सामान्य श्रेणी में शिफ्ट किया जाना चाहिए था, क्योंकि उनके अंक सामान्य श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक थे। याचिकाकर्ता का दावा था कि यदि उन्हें सामान्य श्रेणी में डाल दिया जाता तो ईडब्ल्यूएस श्रेणी में एक सीट खाली हो जाती, जिससे उनका चयन सुनिश्चित हो जाता है।

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सरकारी कर्मियो की सेवा भर्ती मामले में फैसला सुरक्षित
 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्त विधेयक-2024 को चुनौती देने वाली याचिका पर बहस पूरी हो गई है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख दिया है। सोमवार को याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने सरकार की दलीलों का खंडन करते हुए अदालत को बताया कि यह अधिनियम संविधान में निहित है। अनुच्छेदों के प्रावधानों के विपरीत उन्होंने अदालत से इस अधिनियम को खारिज करने की मांग की। इससे पहले बीते बुधवार को महाधिवक्ता ने अपना पक्ष रखा था। उन्होंने अदालत को बताया कि अधिनियम को बनाने का उद्देश्य रेगुलर और कांट्रेक्ट कर्मचारियों को अलग-अलग करना है। अधिनियम में अनुबंध सेवाओं को कहीं पर भी स्थान नहीं दिया गया है। ताज मोहम्मद मामले में पारित फैसले के बाद इस अधिनियम को बनाया गया है। कोर्ट ने 2 अनुबंध कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से भी वित्तीय लाभ देने का फैसला सुनाया था। बताया गया कि इसका फायदा उन्हें भी मिल रहा है, जिनकी नियुक्तियां आरएंडपी रूल्स के मुताबिक नहीं हुईं थीं। इस अधिनियम के बाद सरकार अब जो भी नियुक्ति पत्र दे रही है, वह नए अधिनियम के अनुसार है। हाईकोर्ट में हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्ते विधेयक 2024 को चुनौती दी गई है। 

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