Himachal: विमल नेगी मौत मामले में डीजीपी ने उठाए एसआईटी और एसपी की भूमिका पर सवाल, जानें पूरा मामला
विमल नेगी की मौत मामले में डीजीपी की ओर से हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में शिमला पुलिस की एसआईटी की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं।
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हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (एचपीपीसीएल) के मुख्य अभियंता विमल नेगी की मौत मामले में डीजीपी की ओर से हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में शिमला पुलिस की एसआईटी की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं। डीजीपी अतुल वर्मा ने रिपोर्ट में कहा है कि इस मामले में अभी तक की जांच में कई सवाल हैं। दो वर्ष से ज्यादा समय से तैनात एसपी शिमला की भूमिका पर भी रिपोर्ट में प्रश्नचिह्न लगाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा है कि एसआईटी मामले को आत्महत्या की ओर ले जा रही है। ऊना के पेखूबेला प्रोजेक्ट पर पेन ड्राइव से कम दस्तावेज मिले हुए हैं। एक पीपीटी है, केवल विशेषज्ञ और परियोजना से जुड़े लोग ही इसकी व्याख्या कर सकते हैं। हाईकोर्ट में बुधवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान ये बातें सामने आई हैं।
न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद टिप्पणी की कि डीजीपी और एसपी के आपसी टकराव की वजह से मामले में न्याय मिलने में देरी हो रही है। कोर्ट ने कहा कि न्याय ही होना नहीं चाहिए, बल्कि व्यावहारिकता में होते हुए दिखना भी चाहिए। कोर्ट ने डीजीपी, एसपी शिमला और एसीएस ओंकार शर्मा की जांच रिपोर्ट पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की जांच सीबीआई को देने पर फैसला सुरक्षित रखा है। एक दो दिन के भीतर निर्णय आ सकता है। महाधिवक्ता ने अदालत में अपील की कि मामले में सरकार को कुछ समय दिया जाए, जिससे सच्चाई सबके सामने आ सके और परिजनों को न्याय मिले। उन्होंने बताया कि सरकार पर भरोसा रखें, क्योंकि एसआईटी मामले में सही और गहनता से जांच कर रही है। अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह की ओर से जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई है, उसे अंतिम न माना जाए, क्योंकि यह जांच केवल एचपीपीसीएल के बड़े अधिकारियों पर लगाए आरोपों पर आधारित पर है।
मामला सीबीआई को न सौंपा जाए, कमजोर होगा पुलिस का हौसला : एसपी
एसपी शिमला संजीव गांधी व्यक्तिगत तौर पर अदालत में पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि एसआईटी ईमानदारी और निष्पक्ष तरीके से सभी पहलुओं पर बारीकी से जांच कर रही है। उन्होंने अदालत को बताया कि विमल नेगी की मौत बिलासपुर में हुई थी, वहीं पर पोस्टमार्टम किया गया। यह उनके क्षेत्राधिकार से बाहर था। इसकी वजह से शिमला पुलिस मामले में पहले दखल नहीं कर पाई। मौत के बाद न्यू शिमला थाने में एक एफआईआर दर्ज की गई। उसके बाद एसआईटी गठित की गई। एसआईटी ने पहले जांच कर रही पुलिस टीम के एक सदस्य से पैन ड्राइव को बरामद किया है उसे जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया। उन्होंने कोर्ट से पुलिस जांच पर विश्वास बरकरार रखने की गुहार लगाई और कहा कि मामला सीबीआई को न सौंपा जाए। इससे पुलिस का हौसला कमजोर होगा।
तीनों रिपोर्टें नेगी की मौत के कारणों पर केंद्रित : महाधिवक्ता
महाधिवक्ता अनूप रतन ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह की ओर से जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई है, वह विमल नेगी के साथ बड़े अधिकारियों की ओर से गलत काम करने के लिए दवाब, देर रात काम कराने और प्रताड़ित करने से संबंधित है। यह नेगी की मौत किन कारणों से हुई है और क्यों हुई है, इस पर केंद्रित है। डीजीपी की ओर से जो एसआईटी गठित की गई थी, वह विमल नेगी के गुमशुदा होने के बाद बनाई गई है। दूसरी रिपोर्ट एसपी शिमला की है, जिसमें मौत के कारणों की जांच की जा रही है। तीसरी रिपोर्ट एसीएस की है, जो बड़े अधिकारियों पर लगे प्रताड़ना आरोपों पर आधारित है। तीनों रिपोर्टें नेगी की मृत्यु के कारणों को उजागर करने पर आधारित हैं।
देसराज पर केस दर्ज होने पर भी पुलिस खोज नहीं पाई, मामला सीबीआई को दें : परिजन
परिजनों की ओर से कहा गया कि मामले को सीबीआई को सौंपा जाए। शुरू से ही मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है। देसराज पर एफआईआर दर्ज होने के बाद भी पुलिस उसे खोज नहीं पाई है। वरिष्ठ अधिवक्ता आरके बावा ने कहा कि सरकार की लचीली कार्यप्रणाली की वजह से उसे सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल सरकार की ओर से जमानत के विरोध पर अपना पक्ष नहीं रखा सकी। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपा दिया जाए।