HP High Court: चरस रखने के जुर्म के लिए हिमाचल हाईकोर्ट ने घटाई सजा
प्रदेश हाईकोर्ट ने चरस रखने के जुर्म के लिए सुनाई सजा को घटा दिया। विशेष न्यायाधीश चंबा ने उसे 20 वर्षों की कठोर कारावास और दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने आरोपी को एक वर्ष की सजा सुनाई।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चरस रखने के जुर्म के लिए सुनाई सजा को घटा दिया। विशेष न्यायाधीश चंबा ने उसे 20 वर्षों की कठोर कारावास और दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने आरोपी को एक वर्ष की सजा सुनाई। जुर्माने की सजा को अदालत ने रद्द कर दिया। एक वर्ष से ज्यादा कारावास काटने पर अदालत ने नरेंद्र सिंह को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं। 12 फरवरी 2019 को पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान तुनुहटटी से आरोपी को 13.4 किलोग्राम चरस के साथ पकड़ा था। आरोपी के खिलाफ मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम की धारा 20 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। प्रारंभिक जांच के बाद अभियोजन पक्ष ने विशेष न्यायाधीश चंबा की अदालत के समक्ष चालान पेश किया। अभियोग साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने 26 गवाहों के बयान दर्ज करवाए। निचली अदालत नेे आरोपी को चरस रखने के जुर्म में 20 वर्षों की कठोर कारावास और दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस निर्णय को हाईकोर्ट के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अभियोग साबित करने में नाकाम रहा है। अदालत ने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी से पकड़ी गई चरस की मात्रा को साबित करने में नाकाम रहा है। अभियोजन पक्ष के सुबूतों से सिर्फ यह साबित होता है कि आरोपी से 26 ग्राम चरस ही पकड़ी गई, जिसे सैंपल के तौर पर परीक्षण के लिए भेजा गया था। हालांकि, परीक्षण के दौरान पाया गया कि जिस सैंपल को परीक्षण के लिए भेजा गया है, वह आरोपी से पकड़ी गई चरस की खेप से मेल नहीं खाता है। हाईकोर्ट ने आरोपी को केवल 26 ग्राम चरस के लिए एक वर्ष की सजा सुनाई।
बरमाणा और दाड़लाघाट में सीमेंट प्लांट बंद करने पर सरकार से जवाब तलब
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बरमाणा और दाड़लाघाट में सीमेंट प्लांट बंद करने पर संज्ञान लिया है। अदालत ने राज्य सरकार सहित अंबुजा, एसीसी सीमेंट कंपनी और अदाणी ग्रुप को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 12 जनवरी को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता रजनीश शर्मा ने मैसर्ज अदाणी ग्रुप की ओर से सीमेंट प्लांट को बंद करने के निर्णय को चुनौती दी है। आरोप है कि मैसर्ज अदाणी ग्रुप ने एकाएक दोनों प्लांट बंद कर दिए। इस व्यवसाय से जुड़े हजारों परिवारों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया गया है। याचिका के माध्यम से दलील दी गई कि बरमाणा सीमेंट प्लांट में 4,000 ट्रक सीमेंट ढुलाई के कार्य में लगे थे। इसी तरह दाड़लाघाट में भी 3,500 परिवारों का गुजारा सीमेंट ढुलाई से ही चलता था। ये सारे ट्रक अब सड़क पर खड़े हैं। इससे ट्रैफिक जाम बना रहता है। ट्रक ऑपरेटरों के साथ-साथ मेकेनिक, ढाबे, पेट्रोल पंपों आदि को नुकसान हुआ है। प्लांट बंद करने से ट्रक खरीदने के लिए लोन की किस्त चुकाना भी मुश्किल हो गया है। प्लांट बंद करने से पहले मैसर्ज अदाणी ग्रुप ने न तो राज्य सरकार को एक महीने का नोटिस दिया और न ही श्रम विभाग को प्लांट बंद करने की सूचना दी।