हिमाचल: वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में हाईकोर्ट ने आरएसएम को बनाया मध्यस्थ, जानें पूरा मामला
प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के बहुचर्चित होटल वाइल्ड फ्लावर हॉल से जुड़े संयुक्त उद्यम विवाद में हिमाचल प्रदेश और ईस्ट इंडिया होटल्स लिमिटेड (ईआईएच) के बीच वित्तीय देनदारियों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला पारित किया है।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के बहुचर्चित होटल वाइल्ड फ्लावर हॉल से जुड़े संयुक्त उद्यम विवाद में हिमाचल प्रदेश और ईस्ट इंडिया होटल्स लिमिटेड (ईआईएच) के बीच वित्तीय देनदारियों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला पारित किया है। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच चार्टर्ड अकाउंटेंट के नाम पर सहमति नहीं होने की वजह से आरएसएम इंटरनेशनल कंपनी को मध्यस्थता के लिए नियुक्त किया गया है। यह कंपनी मशोबरा रिसॉर्ट लिमिटेड (एमआरएल) के खातों का निरीक्षण और मिलान करेगी।
न्यायाधीश ज्योत्सना रिवॉल दुआ की अदालत ने राज्य सरकार को इस आदेश के बारे में उक्त कंपनी को सूचित करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने साथ ही दोनों पक्षों को उद्देश्य की पूर्ति के लिए कंपनी को सार्थक सहयोग प्रदान देने को कहा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी की फीस ईआईएच और राज्य को बराबर शेयर में देनी होगी। कोर्ट के आदेशों की अनुपालना रिपोर्ट 14 जुलाई को न्यायालय के समक्ष रखने को कहा गया है। मामले में प्रदेश सरकार का कहना है कि 23 जुलाई के मध्यस्थता के निर्णय के तहत ईआईएच पर कुछ वित्तीय और अन्य दायित्व थोपे गए हैं। ये वित्तीय दायित्व उसके अधिकार हैं और ईआईएच के लिए इनका निर्वहन करना अनिवार्य है।
क्या है मामला
- ईस्ट इंडिया होटल्स लिमिटेड (ईआईएच) और हिमाचल प्रदेश के बीच 30 अक्तूबर 1995 को होटल वाइल्ड फ्लावर हॉल के निर्माण और संचालन के लिए एक संयुक्त उद्यम समझौता (जेवीए) निष्पादित किया गया था। बाद में मशोबरा रिसॉर्ट लिमिटेड (एमआरएल) नामक एक संयुक्त उद्यम कंपनी बनाई गई। राज्य के अनुसार ईआईएच ने समझौते का पालन नहीं किया और अवैध रूप से एमआरएल में राज्य की शेयरधारिता कम कर दी। इसके परिणामस्वरूप राज्य ने 6 मार्च 2002 को जेवीए को समाप्त कर दिया। विवाद को मध्यस्थता के लिए रखा गया और 23 जुलाई 2005 को एक निर्णय पारित किया गया।
इस निर्णय को चुनौती दी गई। 5 जनवरी 2024 को अदालत ने फैसला सुनाया कि ईआईएच निर्णय का पालन करने में विफल रहा है। परिणामस्वरूप, न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश राज्य को वाइल्डफ्लावर हॉल होटल और जेवीए के तहत आने वाली पूरी संपत्ति का कब्जा लेने का अधिकार दिया। ईआईएच को दो महीने के भीतर संपत्ति खाली करने और राज्य को शांतिपूर्ण कब्जा सौंपने का निर्देश दिया गया था। इन आदेशों के खिलाफ ईआईएच ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन 20 फरवरी 2024 को उसकी विशेष अनुमति याचिकाएं खारिज कर दी गईं। हालांकि, ईएचआई को संपत्ति खाली करने और राज्य को कब्जा सौंपने के लिए 31 मार्च, 2025 तक का समय दिया गया था।