अरे वाह! इसकी खेती करेंगे तो मिलेगा सात लाख
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अगर आप बंदरों और जंगली जानवरों के चलते खेत बीजना छोड़ चुके हैं तो अब हर्बल खेती की ओर मुड़ना फायदेमंद होगा। एक तो जंगली जानवर इससे दूर रहेंगे दूसरा सरकार इसके लिए पैसा देगी। हिमाचल में औषधीय खेती के लिए 27 करोड़ का एक प्रोजेक्ट मंजूर हो गया है।
इसमें से 1 करोड़ रुपये की पहली किस्त आयुर्वेद विभाग के मेडिसिनल प्लांट बोर्ड को मिल गई है। इस प्रोजेक्ट के तहत जहां आयुर्वेद विभाग अपनी नर्सरियों को मजबूत करेगा, वहीं किसान भी अपने खेतों में एलोवेरा, कूट और अतीस जैसे औषधीय पौधों की खेती कर सकेंगे। इसके लिए सरकार वित्तीय सहायता भी देगी।
प्रोजेक्ट के तहत मेडिसिनल प्लांट बोर्ड जहां किसानों के उत्पादों को आयुर्वेदिक फार्मेसी के साथ जोड़ेगा, वहीं इन्हीं फार्मेसियों के माध्यम से इन उत्पादों का विपणन भी होगा। आयुर्वेद विभाग हर्बल गार्डन जोगिंद्रनगर और हमीरपुर के मैड़ी में दो मॉडल नर्सरियां स्थापित करेगा। इन पर 20-20 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
इसके अलावा छोटी नर्सरियां हमीरपुर के जंगल झलेड़ा, बिलासपुर और शिमला के घुमरेहड़ा में चार-चार लाख से स्थापित होंगी। इसी प्रोजेक्ट के तहत वन विभाग भी 8 जिलों में छोटी नर्सरियां स्थापित करेगा। इस पर हर नर्सरी पर 4 लाख आयुर्वेदिक विभाग खर्च करेगा।
इन जड़ी-बूटियों पर मिलेगी वित्तीय सहायता
प्रोजेक्ट के तहत अतीस की खेती दो हेक्टेयर भूमि पर होगी। इसके लिए 1.24 लाख की वित्तीय सहायता दी जाएगी। एलोवेरा की खेती के लिए 6 हेक्टेयर भूमि पर 5.1 लाख खर्च होंगे, जबकि कूट की खेती 10 हेक्टेयर भूमि पर होगी। इसके लिए 6.57 लाख की सहायता मिलेगी। इसमें चयनित सैकड़ों किसान अब अपने खेतों में हर्बल पौधे उगा पाएंगे।
जो किसान एवं कृषक समूह औषधीय खेती करने के इच्छुक हों, उनके लिए सुनहरा मौका है। वे राज्य मेडिसिनल प्लांट बोर्ड से भी संपर्क कर सकते हैं। प्रोजेक्ट के तहत ऐसे किसानों की हर संभव मदद की जाएगी।
- डा. दिनेश, ओएसडी आयुर्वेद विभाग