पीटीए शिक्षक रेगुलर करने को नई प्रक्रिया अपनाएगी सरकार
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नियुक्त 7500 से अधिक पीटीए शिक्षकों को नियमित करने के लिए सरकार नई प्रक्रिया अपनाएगी। नियमितीकरण को लेकर कानूनी अड़ंगा न फंसे, इसको लेकर शिक्षा विभाग पब्लिक नोटिस निकालकर लोगों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करेगा।
इनके आधार पर सरकार पीटीए शिक्षकों को लेकर फैसला लिया जाएगा। शिक्षा विभाग आठ मई को प्रस्तावित मंत्रिमंडल बैठक में मामले को ले जाने की तैयारियों में जुटा है।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में तैनात 7500 से अधिक पीटीए शिक्षकों को सरकार बड़ी राहत देने की तैयारी में है।
बीते दिनों सुप्रीमकोर्ट से मामले में मुख्य याचिकाकर्ता पंकज कुमार ने केस वापस ले लिया है। ऐसे में शिक्षा विभाग पीटीए शिक्षकों को नियमित कर सकता है या नहीं? इसको लेकर प्रदेश के विधि विभाग से राय मांगी गई थी।
विधि विभाग ने कहा है कि एक व्यक्ति ने केस वापस लिया है। कुछ अन्य लोगों के केस अभी सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में सुप्रीमकोर्ट के वकीलों से राय लेना जरूरी है। विधि विभाग के इस कमेंट के बाद अब विभाग के अफसर सुप्रीमकोर्ट के वकीलों से संपर्क कर रहे हैं।
यह है मामला
अस्थायी शिक्षकों का यह मामला साल 2015 से सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्रार बेंच में चला था। बीते साल नवंबर में इसे डबल बेंच के लिए शिफ्ट किया गया। 5 जनवरी से मामले की सुनवाई शुरू हुई। याचिकाकर्ता पंकज कुमार ने साल 2013 में मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
आरोप लगाया था कि चहेतों को नौकरी दी गई, जबकि पात्र शिक्षक बाहर कर दिए गए। हाईकोर्ट ने 2014 में अस्थायी शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था। सरकार ने इसके बाद इनके लिए पॉलिसी तैयार कर दी थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद करीब 5500 पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाया गया।
इसी दौरान हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीमकोेर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगाते हुए यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए। इसके बाद से यह मामला सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन है। करीब 2000 पीटीए शिक्षक अनुबंध पर आने से छूट गए हैं।