प्रदेश सरकार ने बजट से ज्यादा खर्च किए 3936 करोड़, वजह करेगी हैरान
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वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए तय बजट सरकारी खर्चों के निपटारे के लिए कम पड़ गया। सरकार को निर्धारित बजट के अलावा 3936 करोड़ का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ा है। इस तरह से सरकार की देनदारियां चालू वित्त वर्ष 2016-17 में पिछले वित्त वर्ष से ज्यादा बढ़ गई। गत वित्त वर्ष 2015-16 में ये अतिरिक्त देनदारियां करीब 2200 करोड़ की थीं।
सीएम वीरभद्र सिंह ने बुधवार को बजट सत्र के पहले दिन 3936.55 करोड़ की अनुदान मांगें सदन पटल पर रखीं। इन्हें पारित करने का अनुरोध किया। वित्त वर्ष 2016-17 में 32 हजार 593 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया था। ये बजट खर्चे निपटाने को कम पड़ गया तो 3936 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि वे वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए अनुपूरक मांगों की प्रथम और अंतिम किस्त प्रस्तुत कर रहे हैं। कहा कि ये अनुपूरक मांगें कुल 3936 करोड़ 55 लाख रुपये की हैं। इनमें से 2304 करोड़ 83 लाख गैर योजना स्कीमों, 502 करोड़ 78 लाख योजना और 1128 करोड़ 94 लाख रुपये का केंद्रीय प्रायोजित स्कीमों के लिए प्रावधान किया है।
ऋणों की अग्रिम वापसी को 1660 करोड़ 39 लाख का प्रावधान
गैर योजना व्यय में मुख्य रूप से 1660 करोड़ 39 लाख ऋणों की अग्रिम वापसी, 160 करोड़ 91 लाख पुलिस और इससे संबद्ध संगठन, 149 करोड़ 3 लाख विभिन्न जलापूर्ति योजनाओं के लिए बिजली के खर्च, 108 करोड़ 74 लाख रुपये एसजेवीएनएल को
जेनरेशन स्टाफ टैरिफ के भुगतान और एचपीपीसीएल को ऋण देने, 46 करोड़ 27 लाख सड़कों के निर्माण को मुआवजे के भुगतान पर खर्च हो रहे हैं। 39 करोड़ 40 लाख भाषा, संस्कृति एवं जनसंपर्क और 13 करोड़ 60 लाख का प्रावधान न्याय प्रशासन के लिए किया है।
सड़कों, पुलों के लिए 108.60 करोड़ का प्रबंध
योजना स्कीमों में मुख्य रूप से 108 करोड़ 60 लाख विभिन्न सड़कों, भवनों और पुलों के निर्माण पर खर्च करने का प्रावधान किया है। 69 करोड़ 16 लाख भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेललाइन और विकास में जन सहयोग, 44 करोड़ 14 लाख नाबार्ड और
एनआरडीडब्ल्यूडी के तहत विभिन्न कार्यों, 34 करोड़ 52 लाख का प्रावधान नए मेडिकल कॉलेज भवनों और आईजीएमसी में नए ओपीडी ब्लॉक का निर्माण करने, 30 करोड़ 47 लाख रुपये स्मार्ट सिटी मिशन और स्वच्छ भारत मिशन के लिए और 11 करोड़ 55 लाख अनुसूचित जाति उपयोजना में खर्चे जा रहे हैं।
446 करोड़ 96 लाख रेणुका बांध विस्थापितों के मुआवजे को
केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं में 446 करोड़ 96 लाख रेणुका बांध विस्थापितों को मुआवजा देने, 187 करोड़ 33 लाख स्मार्ट सिटी मिशन, 172 करोड़ 98 लाख मेडिकल कॉलेज भवनों के निर्माण, 93 करोड़ 46 लाख शहरी अवसंरचना विकास योजना, 81 करोड़ 64 लाख
आपदा प्रबंधन, 45 करोड़ केंद्रीय सड़क निधि अनुदान में सड़क निर्माण, 8 करोड़ 66 लाख आईसीडीएस, आईसीपीएस, सबला, आठ करोड़ 49 लाख सभी लिए आवास और आठ करोड़ एक लाख न्यायिक अवसंरचना के उन्नयन को प्रस्तावित हैं। सीएम ने इन अनुपूरक मांगों को सदन से पारित करने का अनुरोध किया।
सदन में रखा टीसीपी संशोधन विधेयक
राज्यपाल आचार्य देवव्रत से टीसीपी संशोधन विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा सचिव ने इस विधेयक को सभा पटल पर रखा। अब संशोधन विधेयक ने एक्ट का रूप ले लिया है। अधिसूचना से 60 दिन के भीतर लोगों को अवैध भवनों को नियमित कराने के लिए आवेदन करना होगा और एक साल के भीतर इस एक्ट के तहत लोगों के अवैध भवन नियमित कराने होंगे।
विधानसभा से बिल पास होने के बाद उसे स्वीकृति के लिए राज्यपाल को भेजा जाता है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद सरकार इसकी अधिसूचना जारी करती है। उसके बाद उस विधेयक को फिर विधानसभा के सभा पटल पर रखना होता है।
इसके चलते बुधवार को यह विधेयक सभा पटल पर रखा गया। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर विधेयक-2016 संसोधन विधेयक, हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्तित कर - 2016 को सभा पटल पर रखा गया।