मुआवजा तय नहीं, एनएच के लिए डीपीआर तैयार करने में जुटी सरकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश में प्रस्तावित 61 नेशनल हाईवे के निर्माण को लेकर हिमाचल सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। सरकार ने हाईवे का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए डीपीआर बनाने का काम भी शुरू कर दिया है। इसके लिए जिलों को अपने हिस्से के हाईवे के निर्माण के लिए एजेंसी भी हायर करने को कह दिया गया है।
वहीं, हाईवे के निर्माण के लिए जिन किसानों और आम लोगों की जमीनें, दुकानें व मकान अधिग्रहीत होने हैं, उनसे अब तक किसी तरह का समझौता नहीं हो सका है। मुआवजा विवाद के चलते कुल्लू, सोलन, चमेरा, बिलासपुर, परवाणू और शिमला में पहले ही नेशनल हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहीत नहीं हो पा रही है।
इस बीच सरकार द्वारा नए एनएच के डीपीआर बनाने के लिए लिए कंसलटेंट रखने की कवायद पर एक बार फिर फोरलेन संघर्ष समिति भड़क उठी है। समिति के अध्यक्ष ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) खुशाल ठाकुर ने कहा कि सरकार मुआवजे को लेकर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं ले सकी है।
जबकि केंद्र सरकार पहले ही फैक्टर टू लागू कर चार गुणा मुआवजा देने को राजी है। लेकिन प्रदेश सरकार प्रदेशवासियों का हित नहीं चाहती। ठाकुर ने दोहराया कि अगर सरकार ने उचित मुआवजा नहीं दिया तो जमीन का एक कतरा भी हाईवे निर्माण के लिए नहीं लेने देंगे।
यह है विवाद
मौजूदा मार्केट रेट का प्रावधान होने के बावजूद सरकार 2013 के सर्किल रेट के आधार मुआवजा देने की बात कह रही है। साथ ही इसमें भी वह फैक्टर एक लागू कर दोगुना मुआवजा देने की बात कर रही है जबकि केंद्र सरकार फरवरी में ही चार गुणा मुआवजा देने के लिए ग्रामीण इलाकों में फैक्टर दो लागू करने की नोटिफिकेशन जारी कर चुकी है। समिति का कहना है कि जब एनएच का निर्माण करने वाली एजेंसी को चार गुणा मुआवजा देने में आपत्ति नहीं है, तो प्रदेश सरकार क्यों लोगों का हक मारना चाहती है।
5 लाख बिस्वा की जमीन का 13,000 रुपये दे रही सरकार
ठाकुर ने कहा कि कुल्लू, मनाली जैसी जगह जहां पांच से सात लाख रुपये बिस्वा रेट चल रहे हैं, वहां सरकार सर्किल रेट का बहाना बनाकर महज 13 से 15 हजार रुपये के हिसाब से मुआवजा देने की बात कह रही है। अगर सरकार अपने रवैये पर अड़ी रही तो प्रदेश में एक भी नया प्रोजेक्ट न तो शुरू हो पाएगा और न ही पुराने प्रोजेक्ट पूरे हो पाएंगे।