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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal Govt intensifies efforts to secure BBMB arrears after Kishau; CM Sukhu speaks to Union Minister

हिमाचल: बीबीएमबी के 4200 करोड़ के एरियर पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री से मांगा हस्तक्षेप

Mon, 13 Jul 2026 06:22 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 13 Jul 2026 06:22 PM IST
सार

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अब बीबीएमबी से अपने हिस्से के लगभग 4,200 करोड़ रुपये के बकाया की वसूली के लिए सभी कानूनी और प्रशासनिक विकल्पों पर काम कर रही है। 

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Himachal Govt intensifies efforts to secure BBMB arrears after Kishau; CM Sukhu speaks to Union Minister
बीबीएमबी। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना में हिमाचल प्रदेश के हितों को सुरक्षित करने के बाद अब सुक्खू सरकार ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े अपने वित्तीय अधिकारों और हजारों करोड़ रुपये के बकाया की वसूली के लिए दबाव बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर से फोन पर बातचीत कर इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के सक्रिय हस्तक्षेप और सहयोग की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अब बीबीएमबी से अपने हिस्से के लगभग 4,200 करोड़ रुपये के बकाया की वसूली के लिए सभी कानूनी और प्रशासनिक विकल्पों पर काम कर रही है। उन्होंने दोहराया कि यह राशि हिमाचल प्रदेश के लोगों का वैधानिक अधिकार है और सरकार इसे प्राप्त करने के लिए पूरी दृढ़ता के साथ प्रयासरत है।

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मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि हिमाचल प्रदेश लंबे समय से अपने वैधानिक अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहा है और अब राज्य सरकार इन्हें हर हाल में सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी से संबंधित लंबित वित्तीय दावों का समाधान हुए बिना प्रदेश के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती। मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि 422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना पर हिमाचल प्रदेश तभी आगे बढ़ेगा, जब हरियाणा सरकार बीबीएमबी से जुड़े बकाया भुगतान के संबंध में स्पष्ट सहमति दे और इस आशय का शपथ-पत्र सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल करे। उन्होंने कहा कि बार-बार आग्रह के बावजूद पंजाब और हरियाणा ने हिमाचल प्रदेश को उसके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा है। ऐसे में प्रदेश के हितों की अनदेखी करते हुए किसी नई परियोजना में सहयोग की अपेक्षा करना न्यायसंगत नहीं होगा।

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केंद्रीय मंत्री ने दिया समाधान का भरोसा
मुख्यमंत्री के आग्रह पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आश्वासन दिया कि वह इस विषय पर पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों से चर्चा करेंगे। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के वैधानिक अधिकारों की रक्षा और विवाद के समाधान के लिए आवश्यक पहल करने का भरोसा भी दिया।

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15 साल पुराने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को याद दिलाया कि लगभग 15 वर्ष पहले सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में हिमाचल प्रदेश को बीबीएमबी परियोजनाओं और उनसे प्राप्त होने वाले लाभों में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिकार प्रदान किया था। इसके बावजूद प्रदेश को पिछले एक दशक से अधिक समय से अपने हिस्से की 13,066 मिलियन यूनिट बिजली और उससे जुड़े वित्तीय लाभ नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद हिमाचल को उसके अधिकारों से वंचित रखा गया, जिसके कारण प्रदेश को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

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