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लाहौल-स्पीति के आपदा प्रभावितों को राहत देने की तैयारी, मांगे 39 करोड़
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 29 Oct 2018 11:15 AM IST
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सरकार ने जनजातीय क्षेत्र के लोगों को राहत पहुंचाने के लिए केंद्र से 39 करोड़ की वित्तीय मदद मांगी है। लाहौल स्पीति जिले की करीब 23 हजार की आबादी पर प्राकृतिक आपदा का असर पड़ा है। क्षेत्र के किसानों और बागवानों को फसली नुकसान उठाना पड़ा है और साथ ही फलदार पेड़ो को भी क्षति पहुंची है।
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पिछले दिनों भारी बर्फबारी के कारण लाहौल-स्पीति में सबसे ज्यादा असर बागवानी पर पड़ा है और सेब की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। सेब के पेड़ों से फसल झड़ गई और बागवानों को आर्थिक नुकसान हुआ है। बर्फबारी के कारण सेब के 25 से 30 साल के हजारों सेब के पेड़ों को भी नुकसान हुआ है।
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सेब के नए उगाए पौधों को भी क्षति पहुंची है। जो सेब पेड़ों में बचा था, उसे बागवानों ने मंडियों में बेच दिया है परंतु झड़े सेब को सरकार बीस रुपये किलो को हिसाब से खरीद रही है। इसके लिए एचपीएमसी को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसके अलावा बर्फबारी से पशु चारा भी तबाह हुआ है और सर्दियों में पशु चारा जुटाना कठिन हो जाएगा।
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कृषि मंत्री डा. राम लाल मारकंडा ने कहा कि केंद्र सरकार से जनजातीय क्षेत्र के प्राकृतिक आपदा प्रभावितों की मदद के लिए केंद्र से 36 करोड़ की मदद मांगी है। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके केंद्र के पास भेजी है।
सरकार ने फैसला लिया है कि चारा ढुलाई के लिए पशु पालकों को शत प्रतिशत परिवहन उपदान देगी। किसानों को लहसुन और मटर के तीन-तीन पैकेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा बागवानों को प्रूनिंग मशीनें और अन्य सामान भी दिया जा रहा है।
चारा परिवहन में शत प्रतिशत उपदान देगी सरकार
राज्य सरकार ने लाहौल-स्पीति क्षेत्र के प्रभावित पशुपालकों को चारा ढुलाई के लिए शत प्रतिशत परिवहन भाड़ा उपदान देने का फैसला लिया है। पशुपालक अगर बाहर से चारा खरीदकर लाते हैं तो उनके वाहन भाड़ा सरकार देगी।