गौ-संरक्षण के नाम पर सरकार ने वसूल लिया 6 करोड़ का सेस, फिर भी हजारों पशु लावारिस
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गौ-संरक्षण के नाम पर करोड़ों का शराब सेस अर्जित करने वाली सरकार गौ-संरक्षण के लिए कुछ खास नहीं कर सकी है। अभी भी प्रदेश में बीस हजार पशु लावारिस हैं। गौ संरक्षण पर कई विधेयक लाए जा चुके हैं लेकिन जमीनी स्तर पर काम कम ही हो सका है। सरकार के लिखित फरमानों के बाद भी जिलों के डीसी भी गौ-सदनों के लिए भूमि नहीं तलाश पाए हैं।
पंचायतों में भूमि न मिलने से लावारिस पशुओं का पुनर्वास नहीं हो पा रहा है। सरकार ने सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखकर गौ-सदनों के लिए जमीन तलाशने को कहा था। प्रदेश में पशुओं को लावारिस छोड़ने की समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार समय-समय विधेयक लाकर कानून बनाती रही है, लेकिन आज तक लावारिस पशु छोड़ने वालों पर नकेल नहीं कसी जा सकी है।
प्रदेश में करीब 21 लाख गौ-धन
प्रदेश भर में करीब 21 लाख गौ-धन है। इनमें से 9.83 लाख विदेशी नस्लों की गाय हैं। इनके अलावा पहाड़ी नस्ल की गायों की संख्या 11.65 लाख है। प्रदेश भर में भैंसों की संख्या 7.16 लाख है। प्रदेश में सभी गायों, भेड़ों, बकरियों और अन्य पशुओं की संख्या 48.44 लाख है।
हिमाचल में कुल 32 हजार लावारिस पशु
पशु पालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश भर में करीब 32 लाख लावारिस पशु मौजूद हैं। इनमें से सिर्फ 12 हजार गायों का संरक्षण कर गौ-सदनों में रखकर पुनर्वास किया गया है। आज भी प्रदेश में करीब 20 हजार पशु लावारिस सड़कों में भटक रहे हैं।
शराब पर सेस से छह करोड़ जुटाए
सरकार शराब की प्रति बोतल पर एक रुपया सेस गौ-सदन के नाम पर वसूल रही है। करीब छह करोड़ का सेस जुटा लिया है। जिस मकसद के लिए इसे जुटाया जा रहा है, वह अभी तक पूरा नहीं हुआ है।