हिमाचल को खास दर्जा, इन योजनाओं पर बरसेगा पैसा
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हिमाचल प्रदेश के लिए भारत सरकार की ओर से केंद्रीय योजनाओं में अनुदान का अनुपात बढ़ाए जाने से 600 करोड़ रुपये तक का सालाना फायदा हो सकता है। अभी राज्य सरकार को केंद्र सरकार से चिट्ठी नहीं मिली है। इस चिट्ठी के आने के बाद ही राज्य सरकार इसका सही आकलन करेगी।
भारत सरकार ने कोर योजनाओं के रूप में चिन्हित 27 स्कीमों में यह अनुपात 50:50 से बढ़ाकर 90:10 करने का फैसला लिया है। यानी 90 फीसदी पैसा केंद्र सरकार देगी, जबकि 10 फीसदी प्रदेश सरकार को स्वयं मैनेज करने पड़ेगा। इनमें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
इसी तरह से मनरेगा, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए अंब्रेला कार्यक्रम, मल्टी सेक्टोरियल डेवलपमेंट प्लान जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसे 60:40 से 90:10 किया गया है।
इन योजनाओं के बजट में भी होगा इजाफा
इसी तरह से 50:50 के बजाय अब 80:20 के अनुपात से राष्ट्रीय एड्स एवं एसटीडी कंट्रोल प्रोग्राम, राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन जैसी योजनाओं में भी केंद्रीय सहयोग को 80:20 करने का फैसला हुआ है। यह माना जा रहा है कि इन सभी योजनाओं में केंद्रीय सहयोग में लगभग 1000 करोड़ रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
पहले भी 90:10 की सहायता मिलती थी कई योजनाओं में
हिमाचल प्रदेश को विशेष श्रेणी का राज्य मानते हुए पहले भी इसे कई केंद्रीय योजनाओं में 90:10 के अनुपात से केंद्रीय सहायता मिलती थी, मगर बाद में कई योजनाओं में समय-समय पर कटौती की जाती रही।
पढ़िए इस मसले पर क्या कहती है सरकार
‘अभी केंद्र सरकार से हिमाचल सरकार को कोई चिट्ठी नहीं मिली है। पत्र मिलने के बाद ही किसी तरह की प्रतिक्रिया दी जा सकती है। ऐसा है तो हिमाचल को लाभ होगा, मगर योजना आयोग से जो अनटाइड फंड मिलते थे, वे अब नहीं मिल रहे हैं।’- अक्षय सूद, विशेष सचिव वित्त एवं सलाहकार योजना, हिमाचल सरकार।
‘यह महज गैप फि लिंग ही होगा। 2012 में भी इसका विश्लेषण किया गया था कि अगर गैप फीलिंग में सारी स्कीमें 90:10 के अनुपात में चली जाती हैं तो लगभग 300 करोड़ अतिरिक्त पैसा आना था। अब केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं का परिव्यय बढ़ गया है। इसलिए मेरे अनुमान के हिसाब से 600 करोड़ रुपये की राशि हिमाचल प्रदेश में नहीं आने वाली है। 14वें वित्तायोग ने करों की राशि को 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत सभी राज्यों के लिए किया है। केंद्रीय प्रायोजित स्कीमों का पैसा उसी में शामिल होगा। इसमें नई पाइपलाइन नहीं लगने वाली है।’- एसके शाद, पूर्व सलाहकार, योजना, हिमाचल सरकार।
‘ये सूचना अभी नहीं आई है। वैसे हिमाचल प्रदेश कागजों में ही विशेष श्रेणी का राज्य रहा है। हमें मैदानी क्षेत्रों से ज्यादा पैसे की जरूरत रहती आई है।’- वीरभद्र सिंह, मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश।