फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   himachal education department: Many governments came but could not remove the teachers posted in the schools of the cities

शिक्षा विभाग में युक्तिकरण के दावे हवा: कई सरकारें आईं पर शहरों के स्कूलों में डटे शिक्षकों को नहीं हटा पाईं

Wed, 11 May 2022 10:31 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 11 May 2022 10:31 AM IST
सार

प्रदेश में शिक्षकों का सबसे बड़ा कैडर है। ऐसे में सरकारें भी इनको लेकर सख्ती बरतने से गुरेज करती रही हैं। प्रदेश के जिला मुख्यालयों से सटे सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों से अधिक शिक्षक हैं। 

विज्ञापन
himachal education department: Many governments came but could not remove the teachers posted in the schools of the cities
शिक्षक(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में सरकारें बेशक पांच साल बाद बदलती हों लेकिन राजधानी शिमला सहित जिला मुख्यालयों के इर्दगिर्द जमे कई शिक्षक आज तक नहीं बदले जा सके हैं। ऐसे शिक्षकों की संख्या भी बहुत अधिक है जो हर तीन साल बाद सिर्फ  दो ही स्कूलों में ऐडजस्टमेंट करवाकर जिला मुख्यालयों के नजदीक टिके हैं। प्रदेश में शिक्षकों का सबसे बड़ा कैडर है। ऐसे में सरकारें भी इनको लेकर सख्ती बरतने से गुरेज करती रही हैं।  प्रदेश के जिला मुख्यालयों से सटे सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों से अधिक शिक्षक हैं। प्रारंभिक कक्षाओं में शिक्षकों के युक्तिकरण करने को लेकर सरकार के सभी दावे हवा साबित हो रहे हैं। कई शिक्षक बीते लंबे समय से सिफारिशों से शहरों में ही टिके हैं। राजधानी शिमला में नेताओं और अफसरों के नजदीकी शिक्षक कई वर्षों से ट्रांसफर नहीं हुए हैं। सूबे में विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात का भी सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है।

विज्ञापन


इसके चलते प्रदेश के अधिकांश सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षकों के तबादले ऑनलाइन तरीके से करने के लिए जयराम सरकार ने सत्ता में आते ही सॉफ्टवेयर बनाने का काम शुरू किया था। शिक्षकों की नाराजगी को देखते हुए यह प्रस्ताव फाइलों में ही सीमित रह गया है। इसका लाभ जिला मुख्यालय में नियुक्त शिक्षक उठा रहे हैं। प्रदेश के मुख्य शहरों में सैकड़ों ऐसे स्कूल हैं जहां शिक्षकों की नियुक्तियां जरूरत से अधिक है। विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात के अनुसार 30 विद्यार्थियों के लिए एक शिक्षक, 60 के लिए तीन शिक्षक, 91 से 120 विद्यार्थियों के लिए चार शिक्षक होने चाहिए। हकीकत में इस अनुपात का पालन नहीं हो रहा है। प्रारंभिक स्कूलों में विद्यार्थियों की जरूरत से अधिक शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed