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हिमाचल: केसीसी बैंक के ओटीएस घोटाले में ईडी ने ब्रांच मैनेजर को किया तलब, जानें पूरा मामला

Thu, 12 Feb 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 12 Feb 2026 05:00 AM IST
सार

केसीसी बैंक में वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंक के ब्रांच मैनेजर रहे अनिल वालिया को पूछताछ के लिए तलब किया है।

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Himachal: ED summons branch manager in KCC Bank's OTS scam, know the whole matter
केसीसी बैंक - फोटो : संवाद

विस्तार

कांगड़ा केंद्रीय सहकारी (केसीसी) बैंक में वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंक के ब्रांच मैनेजर रहे अनिल वालिया को पूछताछ के लिए तलब किया है। पालमपुर स्थित होटल सरोवर पोर्टिको के कर्ज निपटारे में हुई धांधली को लेकर 17 फरवरी को ईडी शिमला स्थित अपने मुख्यालय में केसीसी बैंक की पालमपुर ब्रांच के मैनेजर अनिल से पूछताछ करेगी। ईडी की जांच की सुई कांगड़ा जिले से संबंध रखने वाले एक नेता की ओर घूम गई है। मामला 45 करोड़ रुपये के कर्ज को महज 21 करोड़ रुपये में सेटल कर बैंक को 24 करोड़ रुपये का चूना लगाने से जुड़ा है। जांच एजेंसी को अंदेशा है कि इस पूरी डील के पीछे एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था, जिसने नियम ताक पर रखकर सरकार के करीबी एक रसूखदार को फायदा पहुंचाया।

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ईडी की प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जिस होटल की बाजार कीमत करीब 40 करोड़ रुपये थी, उसे कागजों पर बेहद कम आंक कर सेटलमेंट का रास्ता तैयार किया गया। इतना ही नहीं, बैंकिंग सेक्टर के सबसे कड़े सरफेसी एक्ट की भी इस मामले में धज्जियां उड़ाई गईं। नियमानुसार, डिफाल्ट की स्थिति में बैंक को संपत्ति पर कब्जा कर उसकी खुली नीलामी करानी चाहिए थी, ताकि अधिकतम वसूली हो सके, लेकिन इस मामले में नीलामी के बजाय बंद कमरे में ओटीएस को मंजूरी दे दी गई।

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सूत्रों के मुताबिक, इस वित्तीय अपराध का सबसे सनसनीखेज पहलू यह है कि ओटीएस की रकम होटल मालिक ने नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली तीसरे पक्ष ने सीधे बैंक के खाते में जमा करवाई। यह सीधे तौर पर बेनामी लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग की ओर इशारा कर रहा है। सितंबर 2025 में बैंक के दस्तावेज जब्त करने के बाद अब ईडी की सुई अब उन प्रभावशाली लोगों की ओर घूम गई है, जिनके इशारे पर बैंक प्रबंधन ने 24 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि माफ कर दी। चर्चा है कि इस मामले में राजनीतिक रसूख का जमकर इस्तेमाल हुआ है। 17 फरवरी को होने वाली पूछताछ में ब्रांच मैनेजर से उन ऊपरी आदेशों और फाइलों पर दर्ज नोटिंग्स के बारे में कड़ी पूछताछ की जाएगी, जिन्होंने इस संदिग्ध डील को हरी झंडी दी थी। यदि वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो धन शोधन निवारक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत न केवल होटल को कुर्क किया जा सकता है, बल्कि बैंक के बड़े अधिकारियों और पर्दे के पीछे बैठे आकाओं पर भी शिकंजा कसना तय है।

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