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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rera Bill passed again after Governor objects to selection committee for chairman

हिमाचल: रेरा अध्यक्ष चयन समिति पर राज्यपाल की आपत्ति के बाद विधेयक दोबारा पारित

Mon, 16 Feb 2026 07:15 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 16 Feb 2026 07:15 PM IST
सार

प्रदेश विधानसभा में भू-संपदा (विनियमन और विकास) हिमाचल प्रदेश संशोधन विधेयक 2025 सोमवार को पारित कर दिया गया। 

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Rera Bill passed again after Governor objects to selection committee for chairman
हिमाचल प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण । - फोटो : विभाग

विस्तार

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में भू संपदा विनियमन और विकास हिमाचल प्रदेश संशोधन विधेयक 2025 को दोबारा पारित करने का प्रस्ताव किया गया। हिमाचल प्रदेश नगर निगम द्वितीय संशोधन विधेयक 2025 को भी सदन में दोबारा पारित करने का प्रस्ताव किए गए। दोनों विधेयक ध्वनिमत से पारित किए गए। दोनों ही विधेयक बगैर किसी संशोधन के पारित किए गए।

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रेरा अध्यक्ष चयन समिति वाले भू संपदा विनियमन और विकास हिमाचल प्रदेश संशोधन विधेयक 2025 विधेयक पर राज्यपाल की टिप्पणी से अवगत करवाते हुए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि इस विधेयक में राज्य उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और उनके नामांकित व्यक्ति को मौजूदा प्रावधान से हटाने का प्रस्ताव किया गया है। उनकी जगह मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव या किसी अन्य सचिव को चयन समिति में शामिल करने का प्रस्ताव है। जहां मुख्य सचिव आवेदक होंगे, वहां अधीनस्थ अधिकारी निष्पक्ष और न्यायपूर्ण तरीके से काम नहीं कर पाएगा। यह विधेयक केंद्रीय विधेयक के प्रावधानों के विपरीत होगा। ऐसे में केंद्रीय नियम के प्रावधान ही मान्य हाेते हैं। इसलिए संशोधन पर विचार करना तर्कसंगत नहीं है।

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वहीं, नगर निगम (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 के  अनुसार अब मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल ढाई वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया गया है। सरकार का तर्क है कि ढाई साल की छोटी अवधि विकास कार्यों के नियोजन और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त नहीं थी। कार्यकाल बढ़ने से नगर निकायों में न केवल राजनीतिक स्थिरता आएगी, बल्कि शहर के विकास के लिए दीर्घकालिक योजनाएं भी सुचारु रूप से पूरी हो सकेंगी। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में भू-संपदा (विनियमन और विकास) हिमाचल प्रदेश संशोधन विधेयक 2025 के अनुसार प्राधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए गठित होने वाली चयन समिति के स्वरूप में बदलाव किया गया है।
 
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अब चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या उनके नामांकित व्यक्ति के स्थान पर प्रदेश के मुख्य सचिव या सचिव को नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। सरकार का तर्क है कि भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण मुख्य रूप से एक प्रशासनिक निकाय है, जिसके संचालन के लिए प्रशासनिक विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति से न्यायपालिका की सीधी संलग्नता खत्म होगी और कार्यपालिका स्वतंत्र रूप से योग्यता आधारित नियुक्तियां कर सकेगी। 
 

मंजूरी के बाद दो विधेयक पटल पर रखे: सदन में सोमवार को विधानसभा सचिव ने राष्ट्रपति और राज्यपाल की मंजूरी के बाद हिमाचल प्रदेश पंचायती राज संशोधन विधेयक 2025 और कारखाना हिमाचल प्रदेश संशोधन विधेयक 2020 सदन के पटल पर रखा।
 
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