हिमाचल प्रदेश: पंडित सुखराम के पोते और अनिल शर्मा के बेटे आश्रय शर्मा ने कांग्रेस छोड़ी
आश्रय ने कहा कि पूरे क्षेत्र का दौरा करूंगा। सुखराम के समर्थकों को एकत्र करूंगा। मुख्यमंत्री जयराम के कार्यकाल में अभूतपूर्व विकास हुआ है। मंडी से सीएम की कुर्सी कभी गवाने नहीं दूंगा।
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विधानसभा चुनाव से पहले हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में नेताओं का पार्टी छोड़ने का सिलसिला जारी है। सदर मंडी से विधायक अनिल शर्मा के भाजपा में ही रहने के निर्णय के बाद हिमाचल की राजनीति के चाणक्य के नाम से मशहूर रहे दिवंगत पंडित सुखराम के पोते आश्रय शर्मा ने भी कांग्रेस से किनारा कर लिया। शुक्रवार को आश्रय ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिया। मंडी में पत्रकार वार्ता में आश्रय ने इसका खुलासा किया। उन्होंने इस दौरान पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह और कौल सिंह के परिवार पर खूब निशाना साधा। कांग्रेस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। कहा कि मेरे पिता ने मेरे लिए मंत्री पद छोड़ दिया था, अब मैं उनके लिए कांग्रेस पार्टी छोड़ रहा हूं।
आश्रय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी मां-बेटे की प्राइवेट लिमिटेड है, जिसमें मां सांसद व अध्यक्ष और बेटा विधायक व महासचिव है। उन्होंने कहा कि एक इंटरव्यू में प्रतिभा सिंह ने अपनी ही पार्टी पर जमकर निशाना साधा। प्रियंका और राहुल गांधी को इमेच्योर बताया। जिन्हें सब कुछ मिला वे कांग्रेस पर छींटाकशी कर रहे, जबकि इतना कुछ होने के बावजूद मेरे दादा कभी कांग्रेस के खिलाफ नहीं बोले। उन्होंने कहा कि 12 साल पूर्व एक आम कार्यकर्ता के रूप में मैंने कांग्रेस में ब्लॉक स्तर पर काम शुरू किया। कांग्रेस में बिताया समय नहीं भूलूंगा। पार्टी के हर पदाधिकारी और कार्यकर्ता का प्यार मिला।
कांग्रेस करवाए हर्ष महाजन के आरोपों की जांच
आश्रय ने कहा कि आजकल विक्रमादित्य गाना गा रहे कि-माये नी मेरिए शिमले दी राहे चंबा है कितनी कर दूर। उन्हें अब चंबा जाने से कुछ नहीं मिलेगा, क्योंकि उनके किचन कैबिनेट की मुख्य कड़ी हर्ष महाजन अब भाजपा में हैं। उन्होंने जो आरोप पार्टी पर लगाए हैं, कांग्रेस उसकी जांच करवाए। हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें पार्टी फंड को लेकर बात हो रही थी। मैं नहीं जानता कि सच क्या है, लेकिन इसकी कड़ी निंदा करता हूं। उन्होंने कहा कि संविधान के कौन से पन्ने पर लिखा हुआ है कि देश के संसाधनों को ऐसे लूटा जाए। इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर बार प्रतिभा सिंह के लिए काम किया, लेकिन जीतने के बाद वह चंपा ठाकुर को टिकट बांटने लगीं।
2019 में वीरभद्र परिवार की वजह से हारी कांग्रेस
इस्तीफा देने के बाद आश्रय शर्मा ने मंडी में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि 2019 में मंडी संसदीय क्षेत्र से विपरीत परिस्थितियों में चुनाव लड़ा। कौल सिंह ठाकुर और सांसद रहीं प्रतिभा सिंह ने चुनाव से किनारा कर लिया। ऐसे में पार्टी आलाकमान के कहने पर मेरे दादा ने अपनी इच्छा अनुसार वीरभद्र सिंह से सुलह कर मुझे चुनाव में उतारा। कुछ शर्तें मनवाने के बाद स्वर्गीय वीरभद्र प्रचार में उतरे, लेकिन वे जनसभाओं में यह कहते रहे कि सुखराम को मैं कभी माफ नहीं करूंगा। बाकी समझदार को इशारा ही काफी है। उस समय मुझे लगा कि मेरे साथ विश्वासघात हुआ है। मैं उन्हें दोष नहीं देता। उस वक्त पता नहीं उनकी क्या मजबूरी रही होगी। अगर विक्रमादित्य उस समय मेरी जगह लड़ते तो हमारा परिवार कभी ऐसा न करता। कौल सिंह द्रंग क्षेत्र में पहले जनसभा करवाते और बाद में लोगों से बोलते फेरा दो। प्रकाश चौधरी ने भी ऐसा ही किया। अगर उस समय कांग्रेस एकजुटता से चुनाव लड़ती तो हार का मार्जिन कम होता। पं. सुखराम का पोता होने की वजह से मेरे खिलाफ यह साजिश रची गई।
जयराम ठाकुर का सदैव ऋणी रहूंगा
आश्रय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने एक ईमानदार मुख्यमंत्री की छवि बनाई है। मुख्यमंत्री ने पं. सुखराम के लिए अपना हेलिकाप्टर उपलब्ध करवाया और स्वयं सड़क मार्ग से अपने विधानसभा क्षेत्र में गए। इसके लिए मैं सदा उनका ऋणी रहूंगा। आश्रय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी महालक्ष्मी की तरह है, जो मंडी को मिली है। अब कई सालों तक मंडी से इसे जाने नहीं देना है।
वीरभद्र के चित्र पर पुष्पांजलि और सुखराम के फाड़े पोस्टर
पं. सुखराम अंतिम समय तक कांग्रेस में रहे। देश और प्रदेश के लिए उनका योगदान रहा है। वीरभद्र सिंह छह बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उनका भी प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मगर दोनों की मृत्यु के बाद कांग्रेसियों की ओर से केवल वीभद्र सिंह को ही श्रद्धासुमन अर्पित किए जाते रहे। जबकि पं. सुखराम के साथ इस मामले में भी भेदभाव किया गया। गांधी भवन से मेरे दादा पंडित सुखराम के पोस्टर फाड़े गए। उससे बड़ा आहत हूं।