विस चुनाव की रणनीति बनाएगी कांग्रेस, बैठक में बुलाए जिला, ब्लॉक अध्यक्ष
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आगामी विधानसभा चुनाव के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कमर कस ली है। चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए चार जुलाई को कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन शिमला में बैठक बुलाई गई है।
बैठक में जहां प्रदेश कांग्रेस कमेटी की राज्य कार्यकारिणी के तमाम सदस्य हिस्सा लेंगे, वहीं जिला कांग्रेस कमेटी, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों के अलावा प्रदेश सचिव, पर्यवेक्षक आदि भी बुलाए जाएंगे। यह जानकारी प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष एवं पार्टी के प्रदेश महासचिव नरेश चौहान ने पत्रकार वार्ता ने दी।
उन्होंने कहा कि धूमल सरकार के माफिया राज को लोग अभी तक भूले नहीं है। कांग्रेस सरकार हर हाल में रिपीट होगी। सीएम वीरभद्र सिंह और पार्टी अध्यक्ष सुक्खू ही आगे चलेंगे। हाईकमान ने साफ कर दिया है कि इन्हीं चेहरों के नेतृत्व में चुनाव लड़े जाएंगे।
बैठक में जिलों, ब्लॉकों और प्रदेश पदाधिकारियों से फीडबैक लिया जाएगा। पंचायत स्तर पर भी कांग्रेस संगठन के कार्यक्रम होंगे। हर बूथ पर पांच कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तैयार किया जाएगा, जो विधानसभा चुनाव के लिए विशेष काम करेंगे। पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता आईएन मेहता, संजय सिंह चौहान और सचिव आशा कंवर भी मौजूद रहे।
जिला और ब्लॉक अध्यक्षों की आपत्ति पर फं सी बागियों की वापसी
चौहान ने कहा कि कांग्रेस से निष्कासित चल रहे कई नेताओं की वापसी अनुशासन समिति की हरी झंडी के बावजूद कुछ जिलों और ब्लॉक अध्यक्षों की आपत्ति के कारण फंसी हुई है। उम्मीद है कि सहमति बनने के बाद इनकी वापसी जल्दी होगी।
जल्दबाजी में लागू किया जीएसटी, आम आदमी भ्रमित: कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जीएसटी को लागू करने के मोदी सरकार के तरीके पर आपत्ति दर्ज की है। कहा कि इससे आम आदमी भ्रमित हो रहा है। उन्हें पता ही नहीं लग पा रहा है कि जीएसटी से कहां क्या स्थिति रहेगी।
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव और मीडिया विभाग के अध्यक्ष नरेश चौहान ने कहा कि कांग्रेस ने जीएसटी बिल का समर्थन किया था, मगर बगैर तैयारी के इसे लागू करना गलत है।
उन्होंने राजीव भवन शिमला में पत्रकारिता वार्ता में पार्टी की ओर से जीएसटी को लागू करने की विधि पर आपत्ति दर्ज की। कहा कि जीएसटी बिल को लागू करने की तैयारी यूपीए सरकार ने ही कर ली थी।
वर्तमान केंद्र सरकार तभी इस बिल को पारित करने की स्थिति में रही, जब कांग्रेस ने भी इसका समर्थन किया। इसे लागू करने की प्रणाली पूरी तरह असफल रही है।
कोई भी ये बताने की स्थिति में नहीं है कि किस वर्ग पर इसका कितना और कैसा असर पड़ रहा है। कम से कम एक महीने का समय देकर इसे लागू किया जाता तो उचित होता।
कांग्रेस और अन्य तमाम दलों से जिस तरह का समर्थन मोदी सरकार को जीएसटी को लागू करने के लिए मिला था, उस हिसाब से इसका प्रदर्शन नहीं रहा। पब्लिसिटी के चक्कर में इसे आनन-फानन में लागू कर दिया गया।