भाजपा ही नहीं, कांग्रेस के एक खेमे के निशाने पर भी सीएम वीरभद्र
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विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के साथ कांग्रेस का एक कैंप मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को टारगेट कर रहा है। भाजपा जिस सत्ता परिवर्तन की बात हर चुनावी फ्रंट पर कर रही है, उसी नेतृत्व को बदलने की मांग अब कांग्रेस विधायकों ने उठाई है।
वीरभद्र हटाओ मुहिम में 6 विधायकों के अलावा पर्दे के पीछे कई कलाकार हैं। कांग्रेस में छिड़ी जंग भाजपा को सूट कर रही है। कांग्रेस में मचे अंदरूनी घमासान पर हाईकमान की चुप्पी नहीं टूट रही।
भाजपा के खिलाफ फ्रंट खोलने के बजाय कांग्रेस अपनी अंदरूनी मोर्चाबंदी में उलझती दिख रही है। अनुभवी सुशील शिंदे का प्रदेश प्रभार ग्रहण करने के बाद अब दोनों कैंप मामला सुलझाने से अधिक एक-दूसरे को निपटाने की मुहिम में दिख रहे हैं।
कांग्रेस संगठन सीएम के विरोध में उतर आया
कुछ अरसे से प्रदेश में पैदा हुए सियासी हालात से भाजपा नेतृत्व सुकून में है। कांग्रेस प्रदेश संगठन और वीरभद्र सरकार के बीच चल रहे मतभेद अब खुलकर सामने आ रहे हैं। फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की रहस्यमयी मौत की गुत्थी से शुरू हुई सियासत को गुड़िया प्रकरण ने चरम पर पहुंचा दिया है।
कानून व्यवस्था के मुद्दे पर भाजपा ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को संसद तक घेरा, लेकिन सरकार के लिए स्थिति तब खराब हुई, जब कांग्रेस संगठन उनके विरोध में उतर आया। इस बीच वीरभद्र विरोधी मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने भी फ्रंट खोल दिया। सरकार के मंत्री जीएस बाली उनके समर्थन में आ गए।
मनकोटिया लगातार मुख्यमंत्री पर हमले करते रहे, लेकिन कांग्रेस ने इसे अनुशासनहीनता नहीं माना। भाजपा पर पलटवार तो दूर मुख्यमंत्री कैंप मनकोटिया के बाद गुड़िया प्रकरण से हो रहे डैमेज को कंट्रोल करने में विफल साबित हुआ।
अब 6 विधायकों के अलावा कांग्रेस के कई जिला अध्यक्षों ने हाईकमान से नेतृत्व परिवर्तन के लिए पत्र भेज दिया है। हैरानी यह है कि वीरभद्र कैंप को इस विरोध की भनक तक नहीं लगी। चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर वर्चस्व को लेकर छटपटाहट से भाजपा के चुनावी समीकरणों को मजबूती मिल सकती है।
शिंदे पर टिका है दारोमदार
कांग्रेस हाईकमान के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे को प्रदेश प्रभारी बनाने के बाद पार्टी के आंतरिक समीकरण बदल सकते हैं। शिंदे के सामने वीरभद्र और सुक्खू कैंप में शीत युद्ध को समाप्त करवाना आसान नहीं है।
चुनाव के मद्देनजर पार्टी को पटरी पर लाने के लिए शिंदे बतौर रेफरी की भूमिका में रहेंगे। दोनों खेमों के फाउल करने पर शिंदे को सीटी को बजानी होगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर कुछ नेताओं को लाल कार्ड दिखाकर बाहर करना पड़ सकता है। ऐसे में शिंदे के प्रभारी बनते ही उनके राजनीतिक कौशल की परीक्षा शुरू हो गई है।
शिमला में भाजपा को मिली संजीवनी
भाजपा पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गई है, जबकि कांग्रेस अपनी खींचतान में उलझी हुई है। भाजपा की अभी तक प्रचार रणनीति से साफ है कि कांग्रेस के मंत्री-विधायकों को कोसने के बजाए मुख्यमंत्री वीरभद्र के खिलाफ ही हमला बोला जाएगा।
भाजपा के आला नेता मानते हैं कि सत्ता वापसी के लिए एकमात्र रोड़ा सीएम वीरभद्र सिंह हैं। शिमला जिला को भाजपा कमजोर मानती है, लेकिन नगर निगम शिमला चुनाव जीतने के बाद गुड़िया प्रकरण से कांग्रेस की साख को पहुंचे नुकसान का फायदा लेने में पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ रही।
सुक्खू को हटाने की लाबिंग में जुटा वीरभद्र खेमा
प्रदेश अध्यक्ष सुक्खू को हटाने के लिए वीरभद्र कैंप ने लाबिंग तेज कर दी है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनके करीबी मंत्री-विधायकों के दिल्ली पहुंचने को इससे जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, दोनों खेमों की तकरार में अब 6 विधायकों के साथ संगठन के कुछ पदाधिकारियों के लेटर बम से नया मोड़ आ गया है। मुख्यमंत्री को हटाने के लिए लिखा पत्र सुक्खू कैंप को मजबूत कर रहा है। सूत्रों के अनुसार वीरवार को भी सीएम कैंप ने कुछ वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की है।
आलाकमान अब इस मामले में प्रदेश प्रभारी सुशील कुमार शिंदे से रिपोर्ट लेगा। मुख्यमंत्री अपनी चिंता नव नियुक्त प्रदेश प्रभारी शिंदे के समक्ष प्रदेश को लेकर अपनी चिंताएं जता चुके हैं। माना तो यह भी जा रहा है कि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के सामने भी संगठन की कार्यशैली की बात सीएम ने रखी होगी।
हालांकि, विधायकों के लैटर बम से सीएम कैंप को धक्का लगा है। अब 3 अगस्त को प्रदेश प्रभारी सुशील कुमार शिंदे के हिमाचल दौरे में विधायकों और जिला अध्यक्षों की बैठकों के दौर के बाद स्थिति साफ होगी। शिंदे दौरे के बाद आलाकमान को संगठन सरकार के मतभेदों से अवगत करवाएंगे।
राष्ट्रपति कोविंद से मिले सीएम
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वीरवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। कोविंद के राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद सीएम उन्हें बधाई देने राष्ट्रपति भवन गए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की।